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Write Off नहीं किए पूंजीपतियों के Loan : जेटली
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अब समय आ गया है कि इस बारे में हकीकत सामने रखी जाए। उन्होंने यूपीए सरकार का नाम लिए बगैर सवाल किया कि आज जो Loan एनपीए हो गए हैं, वे सार्वजनिक बैंकों ने 2008 से 2014 के दौरान किसके कहने पर दिए थे।

NIS Digital Team का कहना है कि-यूपीए सरकार ने यदि Loan देने में अनियमितता बरती तो आपकी सरकार उन Loan को वसूलने में ईमानदारी क्यों नहीं दिखा रही है। क्यों और कैसे विजय माल्या विदेश भाग गया?
और ये भारत की बैंकों का सरदार, सफेद हांथी की तरह क्यों खड़ा है। प्राइवेट और सहकारी बैंकों पर जबरदस्त डण्डा चलाने वाला रिजर्व बैंक, बुत की भूमिका में है अथवा इसके इशारे पर सब होता है और चुपचाप सब देखता रहता है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि सारी कामर्शियल बैंकों के बोर्ड आॅफ डायरेक्टर्स में रिजर्व बैंक का एक प्रतिनिधि बतौर डायरेक्टर होता है। बावजूद ऐसे कर्जों के दिये जाने पर और उसके एनपीए होने पर इसका मुंह कैसे सिला रहता है और क्यों? क्या इसकी कोई जवाबदेही नहीं बनती है?
जेटली ने कहा लोगों को अफवाह फैलाने वालों से पूछने की जरूरत है कि आखिर किसके कहने पर या किसके दबाव में ये Loan दिए गए। उन्हें यह भी पूछना चाहिए कि जब इन Loan लेने वालों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को Loan चुकाने और उस पर ब्याज चुकाने में देरी की तो तत्कालीन सरकार ने इस संबंध में क्या कदम उठाये।
NIS Digital Team का कहना है कि- माना कि उन्होंने बैंकों से Loan दिलाया और नहीं वसूला तो आपकी सरकार हाथ-पर-हाथ धरे क्यों बैठी है। इसका मतलब कि उन्होंने किसी अपराधी को नहीं पकड़ा तो आप भी उस पर मेहरबानी दिखायेंगे और उसे आजाद घूमने देंगे।
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