महाभियोग का प्रस्ताव ऐतिहासिक है

देश के इतिहास में आज तक किसी भी प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ Impeachment नहीं लगाया गया है। नियम के मुताबिक जब इस तरह का कोई नोटिस दिया जाता है तो राज्यसभा सचिवालय दो बातों की जांच करता है। पहला-जिन सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं उसकी जांच और क्या इसमें नियमों का पालन किया गया है ​अथवा नहीं?

जब यहॉं बताया जा रहा है कि  Impeachment प्रस्ताव पर सात रिटायर्ड सासंदों के दस्तखत हैं, तो इस बात को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ना जानते हों आश्चर्य की बात है? और नहीं जानते थे, तब भी अचम्भे की बात है, और जानते हुए भी उन्होंने ऐसा होने दिया तब भी घोर चिंतन की बात है।

Impeachment प्रस्ताव का खारिज किये जाने के लिए इससे बड़ा और कोई कारण हो ही नहीं सकता? जब महाभियोग प्रस्ताव के लिए जो नियम और शर्तें हैं, उन्हीं की आर्हता, कांग्रेस एवं अन्य सात राजनीतिक पा​र्टीयां पूर्ति नहीं करतीं तो इतना बड़ा बवण्डर बिना मतलब मचाये जाने का क्या औचित्य?

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