अकेला नहीं है सऊदी! जानिए कितने दबे-छिपे दुश्मनों से लड़ रहे हूती?
सऊदी का मक्का पैक्ट एक्टिव हो गया है। अब यमन के अंसारुल्ला यहूदी के खिलाफ मदद के लिए तुर्की और पाकिस्तान की फौजें तकनीक और एयरफोर्स सऊदी में आ जाएंगी। पाकिस्तानी फौजें तो पहले से ही सऊदी अरब में जमा हो रही हैं। लेकिन अब मक्का डिफेंस डील के तहत अंसारुल्लाह का मुकाबला करेंगी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अंसारुल्लाह से यमन में इस वक्त जो फौजें मुकाबला कर रही हैं। पिछले 48 घंटों में सऊदी अरब हिमायती फोर्स ने यमन पर भीषण बमबारी की है। एयरफोर्स के जरिए अंसार उल्लाह के ठिकानों को नाबूद करने का दावा किया गया। हालांकि जमीन पर अंसार उल्लाह तेजी से बढ़ रहे हैं। पूरी ताकत से सामना कर रहे हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि जिसे यमन की सरकारी फोर्स कहा जाता है वो किस सरकार के तहत हैंडल हो रही है यह भी साफ नहीं है।
यमन के प्रेसिडेंट जो कि हूतियों के कंट्रोल के बाद सऊदी अरब भाग गए थे अब्दुल रब मंसूर हादी उनकी मौत हो चुकी है। ऐसे में यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकारी फौज और उसके अलायंस में प्रेसिडेंट राशिद अल अलीमी के नेतृत्व वाली यमनी सेना के साथ-साथ कई प्रमुख देश और सैन्य बल शामिल हैं। यमनी सेना कोई एक फ़ोर्स नहीं है। बल्कि उसमें कई लोकल हूं दुश्मन मिलीशिया, सऊदी की रॉयल फोर्स के जवान, कुछ कबायली लड़ाके, कुछ भाड़े के लड़ाके, कुछ तुर्की और पाकिस्तान के लड़ाके सब शामिल हैं। इल्जाम तो यह भी लगता है कि प्रो सऊदी फोर्स में सीरिया से आईएसआईएस यानी दाइश के खंखार दहशतगर्दों को भी अंसारुल्लाह से लड़ने के लिए लाया गया है। सोचिए इतना अमला जमीन और आसमान दोनों ओर से एडवांस हथियारों के साथ चप्पल पहने हूती लड़ाकों से महीने डेढ़ महीने से मुकाबला कर रहा है। लेकिन यमन में अंसार उल्लाह को फतेह मिलती जा रही है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट के हवाले से ताजा अपडेट यह है कि यमन की सरकारी सेना ने सऊदी हवाई हमलों के सहारे बाब अल मंदब के पास कई ठिकानों से अंसारुल्लाह को पीछे धकेलना शुरू कर दिया है। लेकिन अंसार उल्ला ने इन दावों को खारिज किया है और तगड़े जवाबी हमलों की बात कही है।
यमन के सरकारी अलायंस ने मोखा शहर पर फिर कंट्रोल हासिल कर लिया है और अंसारुल्लाह को पीछे हटना पड़ा है। जबकि मोखा सिटी और बंदरगाह पर अंसारुल्ला का करीब महीने भर से कंट्रोल था। यह इलाका बाब अल मंदब के पास है। इससे यह भी साबित हो रहा है कि यहूतियों की पकड़ फिर ढीली पड़ रही है। सोमवार को रियाद में मक्का रक्षा समझौते की इमरजेंसी मीटिंग भी हुई जिसमें सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने सामूहिक रक्षा व्यवस्था को सक्रिय करने और सऊदी अरब में सैन्य बलों की तेजी से तैनाती पर सहमति जता दी है। लेकिन तुर्की और पाकिस्तान की फिलहाल शर्त यही है कि उनकी जो भी फौजें तैनात होंगी वो सऊदी अरब में होंगी। यमन में सऊदी के लिए लड़ने नहीं जाएंगी। यानी हूतियों के हमले का सऊदी से ही जवाब देंगी। खुद यमन में मौत को गले लगाने और अपने सैनिकों को मरवाने का उन्हें कोई शौक नहीं है। ईरान युद्ध में अमेरिका को एक ऐसी ऐतिहासिक और शर्मनाक हार की तरफ बढ़ना पड़ा है। जिसने पूरे पेंटागन के पसीने छुड़ा दिए।



