नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने ’द चिल्ड्रेेन कैन नॉट वेट” नामक रिपोर्ट को जारी करते हुए इस बात पर दुख व्यक्त किया कि भारत में Chiled Sexual Abuse के जितने भी मुकदमे दर्ज किए जाते हैं लेकिन लचर न्यायिक व्यवस्था के चलते उसको निपटाने में दशकों लग जाते हैं।

इसलिए बच्चों को स्वाभाविक रूप से न्याय मिल सके इसके लिए उन्होंने ‘’नेशनल चिल्ड्रेिन्स ट्रिब्यूनल” की मांग की। पॉक्सो‍ के तहत लंबित पड़े मुकदमों के त्वरित निपटान के ख्या‍ल से उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट की भी मांग की।

Chiled Sexual Abuse के आंकड़े जिस तरह सामने आ रहे हैं, और इसके बावजूद न्याय मिलने में देरी हो रही है उस स्थिति में तो न्याय दूर का सपना लग रहा है। दायित्वपूर्ण और त्वरित न्याय मिलने के अभाव में ही कठुवा, उन्नाव, सूरत और सासाराम में बलात्कार और दुर्व्यवहार के लगातार मामले सामने आ रहे हैं और बढ़ रहे हैं।

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