इस रिपोर्ट के अलावा दो अन्य रिपोर्ट भी इस कार्यक्रम में जारी की गईं। एक रिपोर्ट भारत के युवाओं के बीच एक ओर जहां जागरुकता को बढाने और बाल यौन दुर्व्यवहार को कम करने से संबंधित है, वहीं दूसरी रिपोर्ट Chiled Sexual Abuse के परिणाम स्वरूप बच्चों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव को समझने और उससे निपटने और उसका स्था‍ई समाधान खोजने से संबंधित है।

इस कार्यक्रम में शिक्षा शास्त्रियों, विश्वविद्यालय और कॉलेज के शोधार्थियों, सिविल सोसाइटी संगठन के प्रतिनिधियों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों, कानूनी शोधकर्ताओं, न्यायपालिका के प्रतिनिधियों और भारी संख्या में युवाओं ने भाग लिया।

‘’द चिल्ड्रेन्स कैन नॉट वेट” में उल्लखित लंबित मामलों के कुछ उदाहरण यहां निम्निलिखित हैं-

1. सबसे कम समय में न्याय देने वाले राज्य पंजाब, नागालैंड और चंडीगढ़ हो सकते हैं,जहां बच्चों को 2018 में न्याय मिल सकता है।

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