Panchtantra

कान भरने की कला-कहानी की कहानी पंचतन्त्र-7

पिछले अंक के भाग-6 में आपने पढ़ा कि…………… पर यह इतना समय साध्य काम था जिसकी अनुमति न तो मेरी भावी योजनाएं देती थीं। न ही प्रकाशन संस्थान दे सकता था। यह...

PanchTantra की कहानी भाग-छह

पिछले अंक में आपने पढ़ा कि…............वह भाग्यवाद को पूरी तरह खारिज तो नहीं करते पर ‘जो बिधना ने लिख दिया छठे मास के अंत, राई घंटे न तिल बढ़ै रहु रे...

PanchTantra की कहानी भाग-पांच

पिछले अंक में आपने पढ़ा कि.... सेकुलरिज्म पश्चिम के लिए नई अवधारणा हो सकती है। क्योंकि वहां धार्मिक जकड़बंदी इतनी कठोर रही है कि तनिक सी छूट को भी असह्य मान कर...

PanchTantra की कहानी भाग—चार

पुराणों का प्रवेश हुआ भी तो उनका प्रभाव अल्पकालिक ही रहा। पर भारतीय कृतियों में पंचतंत्र अकेली ऐसी रचना है जिसे सही अर्थ में दुनिया का सबसे पुराना ज्ञानकोष कहा जा सकता...

PanchTantra की कहानी भाग—तीन

लोगों का यह दावा कि जो कुछ इसमें है, वही अन्यत्र भी मिलेगा, जिसका वर्णन इसमें नहीं है। भाग दो से आगे पढ़िए ..………… वह कहीं और मिल ही नहीं सकता, यदिहास्ति तदन्यत्र...

PanchTantra की कहानी भाग—दो

PanchTantra के इससे पहले के भाग—एक में आप पढ़ चुके हैं कि—घनचक्कर, रंगा सियार, बेकार पचड़े में पडऩा, मगरमच्छ के आसूं,  नकली शेर, बाघ की खाल, ढ़ोल की पोल, बगुला भगत,...

PanchTantra की कहानी भाग—एक

PanchTantra के इससे पहले के अध्याय में आप पढ़ चुके हैं कि—बूढ़े आदमी की सारी इंद्रिया उसकी आंखों में और जुबान में सिमट आई हैं। हाथों में जुंबिश भले न हो,...

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