फ्लैश न्यूजसाइबर संवाद

मजदूरों की बिवाइयों से झाँकता राष्ट्रवाद !——

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नीचे दी जा रही मार्मिक वेदना को प्रस्तुत करने वाले हैं वरिष्ठ पत्रकार नरेश दीक्षित। उन्हीं की फेसबुक वॉल से यह लिया गया है।

जब यह लेख लिख रहा हूँ तब मेरी कलम से स्याही नही बल्कि वेदना के आँसू निकल रहे हैं। वह वेदना जो मजदूरों पर प्रतिदिन आ रही खबरों से असहनीय हो गई है। औरंगाबाद में मजदूर ट्रेन से कट कर मारे गए, लखनऊ में साइकिल से जाते दम्पतियो की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हुई एक बच्चा अनाथ हो गया।
ऐसी अनगिनत घटनायें एक लेख में समेटना सर्वथा असम्भव है। यह दशा देश के निर्माणकर्ता की है। मजदूर वह वर्ग है जो तमाम दुःख मुसबीत को झेल कर भी राष्ट्रहित में अपना जीवनदान देता है।

COVID-19 migrant labour
COVID-19 migrant labour

किंतु आज जब समाज और सरकार दोनों की ओर वह देखता है तो उसे बेरुखी के सिवाय कुछ भी नहीं मिलता है। वह हजारों किलोमीटर पैदल चल रहा है। कुछ साईकिल से ही हजारों किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं। इन यात्राओं के अनेक दुःखद पहलू भी सामने आ रहे हैं। जो किसी भी मानव को झंझोर कर रख दे रहे हैं। देश में जब राष्ट्रवाद की बात होती है तो वह राष्ट्रवाद पूरे देश को एक रखने की बात करता है। सबको मिलकर देश के प्रति समर्पित रखने की भावना का विकास करता है।

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