फ्लैश न्यूजसाइबर संवाद
पढ़ेंगे ना पढ़ायेंगे प्रोफेसर कहलायेंगे
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हमारे यहां के प्रोफेसरों का आलम यह है कि वे एक ही विषय को सालों साल पढ़ाते रहते हैं। उनके पढ़ाने में कोई बेहतरी नजर नहीं आती, कोई नयी अंतर्वस्तु नजर नहीं आती, उनके क्लास नोट्स में कोई नयापन या नई ठोस सामग्री और समझ नहीं होती।

इसके विपरीत स्थितियां देखें, मैं इन दिनों मिशेल फूको के कक्षा में दिए गए व्याख्यान या यों कहें क्लास नोट्स पढ़ रहा हूँ, उनमें गजब की मेहनत नजर आती है। मिशेल फूको College de France में 1971 से लेकर मृत्यु पर्यन्त प्रोफेसर रहे,वहां नियम था कि प्रोफेसर को साल में 26 घंटे पढ़ाना है, इनमें आधे समय उनको सेमीनार के रूप में बोलना होता है और हर साल नई रिसर्च करके पढ़ाना होता था।वहां पाठ्यक्रम एकदम खुले होते थे।
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