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यूपी में किया प्रदर्शन तो नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी? योगी सरकार ने कैरेक्टर सर्टिफिकेट के बदले नियम, जानें नए निर्देश

यूपी में सरकारी नौकरी करने के लिए यूवाओं के चरित्र सत्यापन के नियम में बदलाव किया गया है। इसमें बताया गया है कि अगर हिंसा और गंभीर अपराधों मे शामिल उम्मीदवारों को सरकारी नौाकरी मिलने में दिक्कत हो सकती हैं। वहीं, पुलिस को अभ्यर्थियों का चरित्र सत्यापन 30 दिन के भीतर उपलब्ध कराना होगा। इस तरह से अब उत्तर प्रदेश में जो प्रदर्शन या फिर किसी हिंसक आंदोलन में शामिल होंगे, उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। योगी सरकार ने अपने आदेश में ये साफ किया है कि अभ्यर्थी किसी भी प्रदर्शन में शामिल होगा या किसी भी तरह की हिंसा में शामिल हुआ तो ऐसे में उसे सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी।

क्या कहता है नया नियम 

नए नियमों के अनुसार, हिंसा या गंभीर अपराधों में संलिप्तता सामने आने पर उम्मीदवार की सरकारी नौकरी की पात्रता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति के विचारों या राजनीतिक विचारधारा के आधार पर फैसला नहीं किया जाएगा। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने मात्र से भी किसी उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।

चरित्र सत्यापन के दौरान उम्मीदवार की पृष्ठभूमि और संबंधित मामले के तथ्यों को ध्यान में रखा जाएगा। केवल आरोप लगने और अपराध साबित होने के बीच के अंतर को समझना भी जरूरी होगा। गंभीर अपराधों या हिंसक गतिविधियों से जुड़े मामलों में नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।

कैरेक्टर सर्टिफिकेट का नया नियम

चरित्र सत्यापन के दौरान उम्मीदवार की पृष्ठभूमि और संबंधित मामले के तथ्यों को ध्यान में रखा जाएगा। केवल आरोप लगने और अपराध साबित होने के बीच के अंतर को समझना भी जरूरी होगा। गंभीर अपराधों या हिंसक गतिविधियों से जुड़े मामलों में नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। इस नियम को सरकारी विभागों से लेकर पंचायतों तक लागू किया गया है। चरित्र सत्यापन की नई नीति के तहत सरकारी विभागों के अलावा निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों, सरकारी उपक्रमों, पंचायतों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के जरिए होने वाली नियुक्तियों के लिए एकीकृत व्यवस्था लागू होगी। इतना ही नहीं, पहले से लंबित चरित्र सत्यापन के मामलों का निस्तारण भी इसी नीति के आधार पर किया जाएगा। इससे विभिन्न विभागों में सत्यापन की प्रक्रिया में एकरूपता लाने और लंबित मामलों को निपटाने में मदद मिलेगी।

पुलिस को 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

नई प्रक्रिया के तहत पुलिस को चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट 30 दिन के भीतर उपलब्ध करानी होगी। इससे सरकारी भर्तियों में सत्यापन की प्रक्रिया समय पर पूरी करने में मदद मिलने की उम्मीद है। भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विभाग उम्मीदवारों की पात्रता का निर्धारण निर्धारित नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर करेंगे।

चरित्र सत्यापन के नए नियमों की 5 बड़ी बातें

हिंसक गतिविधियों पर सख्ती: हिंसा के जरिए सरकार बदलने या सत्ता परिवर्तन कराने की गतिविधियों में शामिल अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है।

किन संस्थानों पर लागू होंगे नियम: नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी निर्देश सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर लागू होंगे।

सिर्फ FIR से नहीं रुकेंगी नियुक्तियां: केवल राजनीतिक विचारधारा, एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा।

30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट: पुलिस को अभ्यर्थियों के चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर उपलब्ध करानी होगी।

कार्यरत कर्मचारियों को राहत: पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए नए सिरे से चरित्र सत्यापन कराना अनिवार्य नहीं होगा।

अहम सवाल: हिंसक गतिविधियों में संलिप्तता का निर्धारण किन आधारों पर होगा और भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी?

इन मामलों में आरोप तय हुए तो नहीं मिलेगी नौकरी

इन निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अपने आप में सरकारी नौकरी से वंचित करने का आधार नहीं होगा। इसी तरह, किसी उम्मीदवार के खिलाफ निर्णय केवल उसकी विचारधारा के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए। वहीं, योगी सरकार की ओर से ये साफ किया गया है कि अगर  हत्या, बलवा, देशद्रोह, फिरौती के लिए अपहरण, दुष्कर्म, दहेज हत्या और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों में आरोप तय होने या दोषी ठहराए जाने पर अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।

इसके अलावा  नकल कराने वाले गिरोह, प्रश्नपत्र लीक करने वाले, साल्वर गैंग, डिजिटल अरेस्ट और यूपीआइ के जरिये ठगी जैसे साइबर अपराधों में शामिल भी अपात्र मानें जायेगें। इसके अलावा दूसरे की जगह परीक्षा देने वाले और फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वाले भी नौकरी के लिए अपात्र होंगे।

सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए जरूरी है कि वे चरित्र सत्यापन और पात्रता से जुड़े नियमों की जानकारी रखें। हालांकि, इन निर्देशों के सटीक दायरे, लागू होने की तारीख और संबंधित विभागों की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक शासनादेश से की जानी चाहिए।

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