बच्ची के मरने के बाद भी 16 लाख का बिल तैयार करने वाला गुरूग्राम फोर्टिस अस्पताल
एसएचओ बगैर जॉंच के तो आम आदमी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सकते हैं। यहॉं तो मामला इतने बड़े Fortis Hospital का है। एफआईआर दर्ज करने से पहले अस्पताल जॉंच करने जायेंगे तो खातिरदारी होगी,और भी कुछ हो सकता है। इसलिए बगैर जॉंच के एफआईआर कैसी?
शिकायत में जयतं सिंह ने अस्पताल को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया है। अस्पताल ने उनकी बेटी के इलाज में आपराधिक लापरवाही की है। इसके अलावा जयंत सिंह ने अस्पताल पर जालसाजी, धोखाधड़ी और बेइमानी का भी आरोप लगाया है।
बच्ची की हत्या गैर-इरादतन कहॉं है? केवल मोटा बिल वसूलने के लिए ऐसे अस्पतालों में ऐसी कहानियॉं रची जाती हैं। इलाज ना करके केवल जालसाजी, धोखाधड़ी और बेईमानी करना ही ऐसे अस्पतालों का मकसद बन गया है।