कार्यकर्ताओं का यह जोश आगामी लोकसभा चुनाव के समय तक जारी रहा तो कांग्रेस (Congress) के लिए उत्थान की राह का निर्माण कर सकते हैं। राहुल गांधी ने देश के तमाम चुनावों में प्रमुख प्रचारक की भूमिका का निर्वाह भी किया है, इसलिए अब राहुल गांधी को अपरिपक्व कहा जाए, यह ठीक नहीं है।
उन्हें अब राजनीति का लम्बा अनुभव भी है। पिछले चुनावों की तुलना में गुजरात विधानसभा के प्रचार में भी राहुल गांधी एक नई भूमिका में दिखाई दिए। चुनाव प्रचार के दौरान ही कांग्रेस कांटे की लड़ाई की भूमिका में आती हुई दिखाई दी।
विरासती पृष्ठभूमि के आधार पर राजनेता बने राहुल गांधी के बारे में अब यह कहना ठीक नहीं माना जा सकता कि कांग्रेस अब वंशवाद को बढ़ावा दे रही है। क्योंकि वास्तविकता यही है कि राहुल के पास एक लम्बा राजनीतिक अनुभव है।
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