बोफोर्स (Bofors) जिन्न को एक बार फिर बाहर निकाल को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जा रहा है। जबकि इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही सीबीआई को फटकार लगा चुका है कि उसने इस मामले में सरकारी खजाने के 250 करोड़ रूपये व्यर्थ में स्वाह कर दिये।
बोफोर्स (Bofors) का मतलब है, हल्की विमानभेदी तोप, जिसकी क्षमता पर आज भी कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती और युद्ध में उसने अच्छे परिणामकारी प्रमाण देकर उसने सिद्ध कर दिया है कि ये डील केवल दलाली के लिए नहीं की गई थी।
ज्ञात हो कि बोफार्स (Bofors) का मामला मात्र 65 करोड़ का है। अब तो 65 करोड़ का घोटाला एक जूनीयर इंजीनियर ही कर देता है और तरक्की पाकर चीफ इंजीनियर भी बन जाता है। इसे तो घोटाला कहा जाना भी ठीक नहीं है, क्योंकि विश्च में कोई ऐसी एक भी कन्ट्री नहीं है, जहॉं की सरकार डिफेन्स डील में डील ना करती हो।
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