हुआ यूँ कि, इस घटना के कुछ हफ़्ते पहले संसद के सभागार में दैनिक जागरण के मालिक स्व. श्री नरेंद्र मोहन जी की पुस्तक का विमोचन श्री अटल बिहारी वाजपई जी कर रहे थे। सभागार की प्रथम पंक्ति में केंद्रीय रेल मंत्री श्री नीतीश कुमार, जहाज़रानी मंत्री श्री शत्रुघन सिन्हा और मैं बैठकर आपस में कुछ चर्चा कर रहे थे।
तभी पीछे से मेरे दोनो कंधों पर किसी ने हाथ मारा तो मैंने मुड़ कर देखा कि वो अमर सिंह थे। वे बोले, ‘विनीत जी, पिछले साल भर से अख़बारों में आपकी खबरें नहीं छप रही। आप कहाँ ग़ायब हो गए हैं?’
मैंने कहा कि आजकल मैं घोटाले नहीं उजागर कर रहा बल्कि ब्रज की सेवा में जुट गया हूँ। अमर सिंह बोले, “ये तो बढ़िया बात है। उत्तर प्रदेश में तो हमारी सरकार बन गयी है आप कोई काम बताइए।” मैंने कहा काम तो कोई नहीं है पर हमने अभी 51 किलो चाँदी का छत्र श्री गिरिराज सेवक समिति की ओर से दानघाटी गोवर्धन मंदिर के लिए बनवाया है। इसे भगवान को अर्पण करने आप आ जाओ तो अच्छा कार्यक्रम हो जाएगा।
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