साइबर संवाद

एशियाई पैरा ओलंपिक: बरेली के बील एग्रो स्टेडियम में जुटे 16 पदक जीतने वाले यूपी के पैरा खिलाड़ी

अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर उत्तर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले 13 पैरा खिलाड़ियों को शनिवार को बरेली में सम्मानित किया गया। जापान के आइची-नागोया में 18 से 24 अक्टूबर तक आयोजित पांचवें एशियाई पैरा खेल 2026 में इन खिलाड़ियों ने पांच स्वर्ण, सात रजत और चार कांस्य सहित कुल 16 पदक जीते थे। परसाखेड़ा स्थित बीएल एग्रो स्टेडियम में बीएल एग्रो और उत्तर प्रदेश पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित समारोह में खिलाड़ियों के संघर्ष, मेहनत और उपलब्धियों का अभिनंदन किया गया।

कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार, पैरा पावरलिफ्टिंग के चेयरमैन जेपी सिंह, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया की उपाध्यक्ष सुमति मिश्रा, बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल और उत्तर प्रदेश पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष खंडेलवाल मौजूद रहे। समारोह का शुभारंभ कृष्णा पब्लिक स्कूल के कक्षा दो से चार तक के विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत ‘मां तुझे सलाम’ की प्रस्तुति से किया।

जेपी सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इन खिलाड़ियों ने उत्तर प्रदेश के साथ पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उनका प्रदर्शन पैरा खेलों की बढ़ती ताकत और प्रदेश में मौजूद खेल प्रतिभाओं को दर्शाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि खिलाड़ियों की सफलता दूसरों को भी अपने सपने पूरे करने के लिए प्रेरित करेगी।

बीएल एग्रो के प्रबंध निदेशक एवं उत्तर प्रदेश पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष खंडेलवाल ने कहा कि पैरा खिलाड़ियों की उपलब्धियां मानवीय इच्छाशक्ति, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का उदाहरण हैं। प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए हरसंभव अवसर मिलना चाहिए। खिलाड़ियों की उपलब्धियों को पहचान देना और समावेशी खेल व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। वहीं, सुमति मिश्रा ने कहा कि खिलाड़ियों ने साबित किया है कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। उनकी उपलब्धियां पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय हैं।

छह बार जिंदगी से हारने का प्रयास, अब डिस्कस थ्रो में जीता रजत

एशियाई पैरा खेलों में राम रतन सिंह ने डिस्कस थ्रो की एफ-51 स्पर्धा में रजत पदक जीतकर उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया। कभी जिंदगी से निराश हो चुके राम रतन आज अपनी उपलब्धि से दूसरे लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। मथुरा के रहने वाले राम रतन सिंह की कहानी संघर्ष और हौसले की मिसाल है। एक समय ऐसा था, जब गर्दन से नीचे लकवा होने के बाद उनके सामने जिंदगी की चुनौतियां इतनी बढ़ गईं कि उन्होंने जीने की उम्मीद छोड़ दी थी। घर के हालात अच्छे नहीं थे और न ही कोई सही मार्गदर्शक।

राम रतन ने बताया कि निराशा के दौर में उन्होंने छह बार आत्महत्या का प्रयास किया। हालांकि, बाद में उन्होंने खुद को संभाला और जिंदगी को एक नया मौका दिया। खेल के प्रति रुचि बढ़ी तो उन्होंने यूट्यूब को अपना सहारा बनाया। गांव में संसाधन कम थे तो उन्होंने यूट्यूब देखकर डिस्कस थ्रो की बारीकियां सीखीं और अभ्यास शुरू किया। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने मेहनत जारी रखी। आखिरकार उनकी लगन रंग लाई और उन्होंने रजत पदक हासिल किया। वह बताते हैं कि उन्हें ये यात्रा पूरी करनी है और भारत को कई पदक दिलाने हैं।

पैरा एथलीटों को सम्मान देने वाला यूपी पहला राज्य-प्रदीप

गाजियाबाद के पैरा एथलीट प्रदीप कुमार ने जैवलिन थ्रो की एफ-54 श्रेणी में पदक जीतने के बाद प्रदेश सरकार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के लिए वह कई वर्षों से मेहनत कर रहे थे और प्रतियोगिता में अपना सौ प्रतिशत देने का प्रयास किया। प्रदीप ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार से मिल रहे प्रोत्साहन से खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन और अधिक पदक जीतने की प्रेरणा मिलती है।

उनके मुताबिक, देश में उत्तर प्रदेश पहला ऐसा राज्य है, जहां पैरा एथलीटों को सम्मान के साथ आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। उन्होंने इस सम्मान और प्रोत्साहन के लिए प्रदेश सरकार के साथ उत्तर प्रदेश पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष खंडेलवाल का भी धन्यवाद किया।

महिला खिलाड़ियों ने दिया आगे बढ़ने का संदेश

एशियाई पैरा खेलों में पदक जीतने वाली महिला खिलाड़ियों ने अपनी सफलता को दूसरी लड़कियों के लिए प्रेरणा बताया। गाजियाबाद की सिमरन शर्मा ने कहा कि हम सभी लड़कियां गांव से ही संबंध रखती हैं। गांवों की लड़कियों को भी आगे आकर खेलों में अपनी प्रतिभा दिखानी चाहिए और उनसे सीख लेकर अपना करियर बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास कर रही है। ऐसे में महिलाओं को भी आगे आकर खेलों में अपना भविष्य तलाशना चाहिए। वहीं, मेरठ की आयुषी वर्मा ने कहा कि जब वर्षों की मेहनत सफल होती है तो बहुत गर्व महसूस होता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी उपलब्धि से दूसरी लड़कियों को भी खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

वर्जन

“गांव की लड़कियां भी आगे आएं और खेलों में हमसे सीखें। सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ कर रही है। महिलाओं को आगे आकर अपना करियर तलाशना चाहिए।”--सिमरन शर्मा, गाजियाबाद

“जब हमारी मेहनत सफल होती है तो बहुत गर्व महसूस होता है। गांवों की बेटियों को भी खेलों में आगे आकर अपने सपने पूरे करने चाहिए।”—आयुषी वर्मा, मेरठ

“खेल के मैदान में मेहनत और हौसले से ही पहचान बनती है। गांव की बेटियों को भी आगे आकर खेलों में हिस्सा लेना चाहिए और अपने हुनर को पहचानना चाहिए।”–—प्रीती पाल, मुजफ्फरनगर

इन्हें मिला सम्मान

सिमरन शर्मा (गाजियाबाद)    100 और 200 मीटर टी-12 – दो स्वर्ण
प्रवीण कुमार (गौतमबुद्ध नगर)    हाई जंप टी-64 – स्वर्ण
सुवर्णा राज (गौतमबुद्ध नगर)    डिस्कस थ्रो एफ-54 – स्वर्ण
आयुष वर्मा (मेरठ)    जैवलिन थ्रो – स्वर्ण, शॉटपुट – कांस्य
प्रीति पाल (मुजफ्फरनगर)    100 और 200 मीटर टी-35 – दो रजत
प्रदीप कुमार (गाजियाबाद)    जैवलिन थ्रो एफ-54 – रजत
अजीत सिंह यादव (इटावा)    जैवलिन थ्रो एफ-46 – रजत
राम रतन सिंह (मथुरा)    डिस्कस थ्रो एफ-51 – रजत
वरुण सिंह भाटी (गौतमबुद्ध नगर)    हाई जंप टी-63 – रजत
स्वाति चौधरी (मेरठ)    पैरा आर्चरी डब्ल्यू-1 – रजत
अनुभव चौधरी (मेरठ)    100 मीटर टी-35 – कांस्य
प्राची पांडेय (उन्नाव)    पैरा टेबल टेनिस क्लास-6 – कांस्य
सुहास यथिराज    पैरा बैडमिंटन एसएल-4 – कांस्य

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