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गोरखपुर की गंगा-जमुनी रंग: गोरखपुर में निकला सीएम योगी का विजयादशमी जुलूस, फूलों से हुआ भव्य स्वागत

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को गोरखपुर में अपने पारंपरिक और अलौकिक अंदाज में विजयादशमी के जुलूस का नेतृत्व किया। नाथपंथ के पारंपरिक परिधान में सुसज्जित होकर जब सीएम योगी विजयरथ पर सवार हुए, तो पूरा शहर ‘जय श्रीराम’ के जयकारों और तुरही, नगाड़ों व बैंड-बाजे की गूंज से गूंज उठा।

यह भव्य शोभायात्रा गोरखनाथ मंदिर से निकलकर मानसरोवर मंदिर और वहां से मानसरोवर रामलीला मैदान तक पहुंची। इस यात्रा के दौरान एक बार फिर गोरखपुर की ऐतिहासिक और साझी संस्कृति (गंगा-जमुनी तहजीब) की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली, जब रास्ते में विभिन्न समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर इस पर्व में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

भगवान शिव और श्रीराम की आराधना

शोभायात्रा के दौरान सबसे पहले सीएम योगी मानसरोवर मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने देवाधिदेव भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद यात्रा मानसरोवर रामलीला मैदान पहुंची। यहां मंच पर पहुंचकर उन्होंने भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की भूमिका निभा रहे कलाकारों की आरती उतारी और उनका राजतिलक किया। इस दौरान आर्य नगर रामलीला समिति के अध्यक्ष पुष्पदंत जैन ने अंगवस्त्र पहनाकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

मुस्लिम और सिंधी समाज ने पेश की भाईचारे की मिसाल

इस जुलूस की सबसे खास बात यह रही कि मंदिर परिसर से बाहर निकलते ही मुस्लिम समुदाय, बुनकरों और सिंधी समाज के लोगों ने अभूतपूर्व तरीके से मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के पूर्व चेयरमैन चौधरी कैफुलवरा ने सीएम योगी को माला पहनाकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने भी सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए मंदिर के नौ दिनों के शारदीय नवरात्र अनुष्ठानों का पवित्र प्रसाद चौधरी कैफुलवरा और समुदाय के अन्य सदस्यों को वितरित किया। चौधरी कैफुलवरा ने बताया कि उनका पूरा परिवार पीढ़ियों से इस पारंपरिक जुलूस का स्वागत करता आ रहा है।

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश हज कमेटी के सदस्यों—जुनैद अहमद अंसारी और अजीजुल हई—तथा बुनकर वेलफेयर सोसाइटी के सदस्यों ने भी जुलूस का गर्मजोशी से स्वागत किया।वहीं, सिंधी समुदाय के लोगों ने श्री झूलेलाल मंदिर के पास मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का स्वागत किया और मानसरोवर मंदिर की ओर बढ़ रहे जुलूस पर पुष्प वर्षा की। यह आयोजन एक बार फिर इस बात का गवाह बना कि कैसे आस्था, परंपरा और आपसी भाईचारे का यह संगम गोरखपुर की पहचान को और अधिक मजबूत करता है।

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