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असद का एनकाउंटर बढ़ाएगा अपराध मुक्त प्रदेश की धाक! यूपी के निकाय चुनाव में BJP को होगा लाभ

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) छह साल पहले कानून व्यवस्था के नाम पर उत्तर प्रदेश की सत्ता से अखिलेश यादव को बेदखल करके काबिज हुई थी। तब से लेकर आज तक सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी की कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए हुए हैं। इस नीति के तहत उन्होंने दंगाइयों और अपराधियों के घरों पर बुलडोजर चलवाए। पुलिस को अपराधियों का एनकाउंटर करने की छूट दी।

ऐसे में जब गत 24 फरवरी को प्रयागराज में उमेश पाल और दो सरकारी गनर को अतीक अहमद के बेटे असद, गुलाम, साबिर, अरमान और विजय चौधरी उर्फ उस्मान ने गोली और गुड्डू मुस्लिम ने बम मार कर हत्या कर यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना को अंजाम देने वाले अपराधियों को मिट्टी में मिला देने का ऐलान किया।

सीएम के इस ऐलान के बाद से ही यूपी की STF उमेश पाल के हत्यारों को ठिकाने लगाने के लिए दिन रात एक किए हुए थी। गुरुवार को STF ने झांसी में माफिया अतीक अहमद के बेटे और पांच लाख के इनामी असद और उसके साथी गुलाम को एनकाउंटर में मार गिराया।

विपक्ष की बोलती बंद
STF के इस एक्शन ने यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करने और योगी सरकार की अपराधियों के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की आलोचना करने वाले नेताओं की बोलती बंद कर दी है। माफिया अतीक अहमद के बेटे असद का मारा जाना बड़ी घटना है। विपक्ष के नेताओं को लगता था कि अतीक अहमद के बेटे को पुलिस पकड़ नहीं पाएगी।

लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह विश्वास था कि सूबे की पुलिस और STF के अफसर असद और उसके साथियों को ठिकाने लगाने में सफल होंगे। और हुआ भी यही. माफिया अतीक अहमद अपने परिवार के प्रति दया दिखने की गुहार करता रहा और STF के जवानों में अतीक अहमद के बेटे असद और उसके साथी गुलाम को मिट्टी में मिला दिया।

इस घटना की जैसे ही सूचना फैली विपक्षी नेताओं की बोलती बंद हो गई। विपक्ष के किसी भी नेता ने असद और गुलाम के मारे जाने को लेकर STF के एक्शन की सराहना नहीं की, जबकि सीएम योगी आदित्यनाथ ने उमेश पाल की हत्या करने वाले अपराधियों में शामिल रहे असद और गुलाम के एनकाउंटर में मारे जाने को लेकर STF की सराहना की। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी यह कहा कि यूपी की कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले माफिया अतीक अहमद के बेटों को ठिकाने लगा दिया गया है।

इसी तरह से अन्य अपराधियों को भी ठिकाने लगाया जाएगा और STF की इस कार्रवाई की सभी लोग सराहना कर रहे है। क्योंकि उन्हें लग रहा है कि योगी सरकार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में संकोच नहीं करती। जिसके चलते बीते छह वर्षों से बड़े अपराधियों की अरबों रुपए की संपत्ति जब्त की गई और अवैध संपत्ति पर बुलडोजर चला है।

अपराधियों को उनकी औकात बताई
लखनऊ में एक बड़े अखबार के संपादक रहे कुमार भवेश भी मानते हैं कि 24 फरवरी से फरार माफिया अतीक अहमद के बेटे असद और उसके साथी को मार गिराने की कार्रवाई बेहद ही महत्वपूर्ण है। STF के इस एक्शन से जनता में यह संदेश गया है कि अब यूपी में अपराध करने वाले किसी भी अपराधी के प्रति दया नहीं दिखाई जाती। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच बिल्कुल साफ है कि जो भी व्यक्ति कानून की अनदेखी करेगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

योगी सरकार की इस नीति का लाभ भाजपा को बीते विधानसभा चुनाव में मिला था और अब इस निकाय चुनाव में भी मिलेगा। कुमार भवेश का यह दावा हवा हवाई नहीं है. वह कहते कि मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव के शासन में अपरधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में अपराधी का चेहरा और जाति देखी जाती थी. लेकिन अब ऐसा नहीं है।
अब जिसने भी अपराध किया उसे सजा दिलाने पर जोर दिया जाता है. यही वजह है कि अब देश का कोई सीएम योगी मॉडल की बात करता है तो उनका इशारा ‘बुलडोजर की राजनीति’ की ओर होता है।

योगी आदित्यनाथ की सफलता यही है कि उन्होंने यूपी में अपराधियों पर नकेल कस दी है। उन्होने दंगाइयों और अपराधियों के घरों पर बुलडोजर चलवाए।अखिलेश यादव ने बीते विधानसभा चुनाव के दौरान एक सभा में योगी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘बुलडोजर बाबा’ कहा था. इसके बाद ‘यूपी की मजबूरी है। बुलडोजर ज़रूरी है’ और ‘बाबा का बुलडोजर’ जैसे नारे यूपी में गूंजे और योगी सरकार फिर से सूबे की सत्ता पर काबिज हो गई।

अब फिर असद का एनकाउंटर किए जाने से ऐसा माहौल बना है। इसका राजनीतिक लाभ भाजपा को निकाय चुनाव में मिलेगा। यूपी में बेहतर कानून व्यवस्था की चाहत रखने वाले शहरी लोग निकाय चुनाव में भाजपा का साथ देंगे। क्योंकि उन्हे फिर से यह अहसास हुआ है कि अपराधियों को उनकी औकात बताने की जिगरा योगी सरकार में ही है।

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