रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई गुरुवार से सुप्रीम कोर्ट में शुरू हो रही है। लेकिन यह आज का मामला नहीं है। इस विवाद का अदालती सफर आजादी से काफी पहले सन 1885 में ही शुरू हो गया था।
निर्मोही अखाड़ा के महंत रघुवरदास ने उस वक्त स्थानीय सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपील दायर की थी कि बाबरी मस्जिद से लगे रामचबूतरा पर उन्हें मंदिर निर्माण की इजाजत दी जाए। हालांकि मंदिर-मस्जिद विवाद 1528 में ही सामने आ चुका था।
मान्यता के अनुसार भारत के पहले मुगल शासक बाबर के आदेश पर उसके सेनापति मीर बाकी ने रामजन्मभूमि (Ram Janmbhoomi) पर बने मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण कराया था। इसके बाद से ही मंदिर-मस्जिद को लेकर दोनों समुदायों में समय-समय पर छिट-पुट तनाव का जिक्र मिलता है।
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