लॉ फर्म एमजेडएम के मैनेजिंग पार्टनर जुल्फीकार मेमन ने कहा, ‘कथित भ्रष्टाचार का पैसा कहां रखा गया है, इसका पता एजेंसियां लगा सकती हैं। उसके बाद पीएनबी कुछ कर्मचारी और नीरव मोदी के बीच मिलीभगत के मामले में आपराधिक केस दर्ज करा सकता है। बैंक यह कह सकता है कि इस मिलीभगत के चलते उसे नुकसान हुआ।’
लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी एसेट का पता लगाना तो आसान है, लेकिन रिकवरी मुश्किल होती है। मेमन ने बताया, ‘ऐसे कथित भ्रष्ट लोग विदेश में अपने नाम पर संपत्ति नहीं खरीदते और न ही पैसा जमा कराते हैं।
इसलिए उनकी रिकवरी आसान नहीं होती। PNB को अदालत में आखिरकार यह साबित करना होगा कि इन कर्मचारियों ने PNB के खिलाफ आपराधिक साजिश की और इससे बैंक को नुकसान हुआ।’
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