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संसद ने आम बजट 2026-27 को दी मंजूरी : वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- लॉकडाउन की गुंजाइश नहीं, गलतफहमी फैलाना बंद करें नेता

 संसद ने शुक्रवार को आम बजट 2026-27 को मंजूरी दे दी तथा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय मूल्य आसमान छूने के मद्देनजर दो-टूक शब्दों में कहा कि भारत में लॉकडाउन की कोई गुंजाइश नहीं है तथा इसे लेकर गलतफहमी नहीं फैलायी जानी चाहिए। राज्यसभा ने वित्त मंत्री के जवाब के बाद वित्त विधेयक 2026-27 को ध्वनिमत से लौटा दिया। इसी के साथ उच्च सदन ने अनुदान की अनुपूरक मांगों और उससे जुड़े विनियोग विधेयक को भी ध्वनिमत से लौटा दिया। लोकसभा इनको पहले ही मंजूरी दे चुकी है।

राज्यसभा में वित्त मंत्री सीतारमण ने वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि देश को विकसित बनाने और 140 करोड़ भारतीय नागरिकों की अकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों ने यह प्रश्न किया था कि पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद कर घटाये जाने के बाद सरकार 2026 वित्त वर्ष में 4.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को कैसे हासिल करेगी? इसका जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार के कुल राजस्व में उत्पाद शुल्क से होने वाले राजस्व का योगदान करीब 10 प्रतिशत होता है।

सीतारमण ने कहा कि अतिरिक्त साधनों को जुटाना, विकास को बढ़ावा देने वाले व्यय को प्राथमिकता देना, कल्याणकारी व्यय को बेहतर तरीके से लक्षित करना तथा राजकोषीय कामकाज में अधिक पारदर्शिता रखना, सरकार की महत्वपूर्ण पहचान रहे हैं। उन्होंने कहा कि इनका पालन करते हुए सरकार राजकोषीय रुख को कायम रख पायेगी। उन्होंने उम्मीद जतायी कि गैर कर राजस्व के माध्यम से अधिक कोष एकत्र करके भी इसकी भरपाई कर ली जाएगी।

वित्त मंत्री ने उम्मीद जतायी कि सरकार इस स्थिति का सामना कर लेगी क्योंकि ‘हम काफी सतर्क हैं।’ उन्होंने ध्यान दिलाया कि विश्व भर में पश्चिम एशिया संकट के बाद विभिन्न देशों में तेल के दाम 30 से 50 प्रतिशत बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार साल में रूस एवं यूक्रेन के बाद कच्चे तेल एवं उर्वरकों के दामों पर जबरदस्त दबाव पड़ रहा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि किंतु सरकार की सारी नीतियों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह वाक्य मार्गदर्शक साबित हो रहा है कि ‘हमारे नागरिक पर बोझ नहीं पड़े।’ उन्होंने कहा कि सरकार ने एक अधिसूचना जारी की है जिसमें पेट्रोल पर लगने वाले उत्पाद कर को 13 रूपये से घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया गया जबकि डीजल पर लगने वाले 10 रूपये प्रति लीटर कर को शून्य कर दिया गया है।

सीतारमण ने कहा कि इसका परिणाम है कि भारत में पेट्रोल एवं डीजल के दाम अपरिवर्तित बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद है कि कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दामों में होने वाले उतार चढ़ाव और इसकी आपूर्ति में अनियमितता के प्रभावों से देश में आम आदमी को बचाया जा सके।

उन्होंने कहा कि भारत में जो तेल शोधक कंपनी तेल शोधन के बाद बाहर भेज रही है, उन पर निर्यात शुल्क बढ़ाया गया है। वित्त मंत्री ने पाकिस्तान आदि पड़ोसी देशों में पेट्रोल एवं डीजल के बढ़ते दामों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कुछ नेता इस बात को लेकर गलतफहमी फैला रहे हैं कि लॉकडाउन लगाया जाएगा।

उन्होंने कहा, ”भारत में लॉकडाउन की कोई गुंजाइश नहीं है। यह गलतफहमी फैलाना नेताओं को छोड़ना चाहिए। निराधार अफवाहें.. जनता के मन में भय फैलाने के लिए कुछ भी कह दो। लॉकडाउन पाकिस्तान में हो रहा है, भारत में नहीं।” उन्होंने सरकार द्वारा गरीबों पर अधिक कर लगाने और अमीरों को इसमें राहत देने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चाहे परोक्ष करों की बात हो या जीएसटी की बात हो, किसी में भी अमीर या गरीब के बीच भेदभाव नहीं किया गया।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार उपकर और अधिभार के माध्यम से जो भी धन एकत्र करती है, उससे अधिक खर्च कर देती है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल एवं जीएसटी मुआवजे को निकाल देते तो कुल मिलाकर उपकर वसूली अनुमानित 23.34 लाख करोड़ रही जबकि सरकार ने इन क्षेत्रों में 24.82 लाख करोड़ रूपये व्यय किए हैं।

वित्त मंत्री ने लोकसभा में एक फरवरी को आम बजट पेश किया था और उसी के साथ संसद में बजट पारित होने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। आज वित्त विधेयक पारित होने के साथ यह प्रक्रिया संपन्न हो गयी। आम बजट 2026-27 में 53.47 लाख करोड़ रुपये के कुल व्यय की प्रस्तावना की गयी है, जो 31 मार्च 2026 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष की तुलना में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि है।

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