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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन बुधवार को किया जाएगा। सम्मेलन के समापन सत्र को लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला संबोधित करेंगे, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी समापन कार्यक्रम में अपने विचार रखा।
सम्मेलन के दौरान देशभर की विधानसभाओं और विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारियों ने विधायी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन किया।
विशेष रूप से विधान सभाओं की बैठकों के लिए एक न्यूनतम अवधि तय करने के विषय पर व्यापक चर्चा हुई, ताकि जनप्रतिनिधियों को जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रभावी ढंग से उठाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। इस सम्मेलन में देश के 28 राज्यों, तीन केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं तथा छह विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की।
प्रतिनिधियों ने विधायी प्रक्रियाओं में तकनीक के अधिकतम उपयोग, जनप्रतिनिधियों के क्षमता-विकास, संसदीय मर्यादाओं और जवाबदेही को सुदृढ़ करने पर अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। सम्मेलन में इस बात पर भी सहमति बनी कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर विधानसभाओं की कार्यकुशलता बढ़ाई जा सकती है, वहीं सदस्यों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से संसदीय विमर्श की गुणवत्ता में सुधार संभव है।
साथ ही, लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए संसदीय जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। “सशक्त विधायिका, समृद्ध राष्ट्र” के मूल संदेश के साथ सम्मेलन का समापन बेहतर संसदीय परंपराओं को आगे बढ़ाने और लोकतंत्र को और अधिक मजबूत करने के संकल्प के साथ किया जाएगा। समापन समारोह के पश्चात लोक सभा अध्यक्ष श्री बिरला मीडिया को संबोधित करेंगे और सम्मेलन में हुई चर्चाओं तथा लिए गए प्रमुख निष्कर्षों की जानकारी साझा करेंगे।
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