कश्मीर पुलिस ने रविवार को जवानों के खिलाफ हत्या (302) और हत्या की कोशिश (307) का केस दर्ज किया था। इस बीच 27 जनवरी को हुई फायरिंग में मरने वालों की संख्या तीन हो गई है। बुधवार को अस्पताल में इलाज के दौरान जख्मी एक और पत्थरबाज ने दम तोड़ दिया।
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इस मसले पर राज्य में सत्ताधारी गठबंधन पीडीपी और बीजेपी के बीच भी तनातनी देखी जा रही है। बीजेपी इस एफआईआर को वापस लेने की मांग कर रही है, जबकि पीडीपी ने इसे खारिज कर दिया है।
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि जांच को तार्किक नतीजे तक पहुंचाया जाएगा। लग रहा है कि वह हिन्दुस्तान में ना होकर पाकिस्तान में हैं और कश्मीर अलग मुल्क है। जिस RPC (Ranveer Panel Code) के तहत उन्होंने एफआईआर दर्ज कराई है, दरअसल उसका कोई वजूद हिन्दुस्तान में नहीं है। इस सबके बीच सोशल मीडिया पर एफआईआर में नामदर्ज मेजर को बचाने के लिए मुहिम शुरू कर दी गई है।