उत्तर प्रदेश

बिजली अभियंताओं के निलंबन से नाराज, आधा दर्जन मुख्य अभियंता VRS की तैयारी में

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ऊर्जा निगमों के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन में बिजली कर्मियों के निलंबन मामला तूल पकड़ रहा है। करीब आधा दर्जन मुख्य अभियंता स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की तैयारी कर रहे हैं। पावर आफीसर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। इस बीच, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर झांसी में बिजली पंचायत कर कर्मियों ने निजीकरण प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया।
उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष केबी राम और कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में एक गोपनीय जांच टीम बनाकर जांच की जाय। उन्होंने कहा कि पावर कॉर्पोरशन व बिजली कंपनियों का प्रबंधन बिजली अभियंताओं का मनोबल तोड़ रहा है। इससे आने वाले समय में ऊर्जा क्षेत्र में गिरावट आएगी और उसका खामियाजा प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ सकता है।

उधर, निजीकरण के विरोध में झांसी में हुई बिजली पंचायत में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण की एकतरफा कार्रवाई कर ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बना रहा है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों शैलेंद्र दुबे, जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, पीके दीक्षित, दीपक चक्रवर्ती व सरजू त्रिवेदी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि निजीकरण के विरोध में एक जनवरी को बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बंधेंगे और एक जनवरी को काला दिवस मनाया जाएगा। पदाधिकारियों ने कहा कि पांच जनवरी को प्रयागराज में अगली बिजली पंचायत आयोजित की जाएगी।

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