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जीवन जीने की कला है Yoga : डॉ नीलम महेन्द्र

“Yoga स्वयं की स्वयं के माध्यम से स्वयं तक पहुँचने की यात्रा है, गीता ”
Yoga के विषय में कोई भी बात करने से पहले जान लेना आवश्यक है कि इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आदि काल में इसकी रचना, और वर्तमान समय में इसका ज्ञान एवं इसका प्रसार स्वहित से अधिक सर्व अर्थात सभी के हित को ध्यान में रखकर किया जाता रहा है।

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अगर हम Yoga को स्वयं को फिट रखने के लिए करते हैं तो यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन अगर हम इसे केवल एक प्रकार का व्यायाम मानते हैं तो यह हमारी बहुत बड़ी भूल है। आज जब 21 जून को सम्पूर्ण विश्व में Yoga Day बहुत ही जोर शोर से मनाया जाता है, तो आवश्यक हो जाता है कि हम योग की सीमाओं को कुछ विशेष प्रकार से शरीर को झुकाने और मोड़ने के अंदाज़, यानी कुछ शारीरिक आसनों तक ही समझने की भूल न करें।

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