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गेंहू का रिकॉर्ड क्रय करने के बाद वर्तमान धान क्रय की दिशा में प्रदेश सरकार मजबूती के साथ बढ़ी – मुख्यमंत्री

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज जनपद गोरखपुर में योगी राज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में नाबार्ड द्वारा राज्य ऋण संगोष्ठी 2022-23 एवं ग्रामीण समृद्धि सम्मान समारोह को सम्बोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने उ0प्र0 राज्य सहकारी बैंक को नाबार्ड के माध्यम से अल्प अवधि फसली ऋण के अन्तर्गत 2200 करोड़ को स्वीकृति पत्र, बड़ौदा यू0पी0 बैंक व डी0सी0सी0बी0 के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों एवं कृषकों को दिये गये।

ऋण का स्वीकृति पत्र, बड़ौदा यूपी बैंक गोरखपुर को वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम के तहत 2.50 करोड़ का स्वीकृति पत्र, नाबार्ड से यू0पी0एस0जी0वी0बी0/जे0एल0टी0एस0 को डिजीटलीकरण हेतु स्वीकृति पत्र, स्टेट बैंक द्वारा एफ0पी0ओ0 को ऋण स्वीकृति पत्र प्रदान किया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री जी ने  कसया मिल्क ए0टी0एम0 का अनावरण, स्टेट फोकस पेपर 2022-23 का अनावरण, नाबार्ड के चार वर्ष पूर्ण होने पर कॉफी टेबल बुक का विमोचन करने के साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों एवं कृषक उत्पादक संगठनों का सम्मान भी किया गया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। वर्ष 2014 में देश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री ने भारत की कृषि प्रधान व्यवस्था को केन्द्र व शासन का एजेण्डा बनाया। उन्होंने गांव, गरीब, किसान, नौजवान के हित को ध्यान में रखकर योजनाएं बनायीं। उनके मार्गदर्शन में अनेक कार्यक्रम प्रारम्भ हुए जैसे के0सी0सी0, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना, यह सब उसी का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया कोरोना जैसी महामारी से त्रस्त थी तब प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत एक बड़े लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा था। वह लक्ष्य आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करना था, जिसके लिए एक लाख करोड़ रुपये के कृषि इन्फ्रास्ट्रक्टर की व्यवस्था प्रधानमंत्री ने की। उन्होंने कहा कि इसके अन्तर्गत लगभग 10 हजार एफ0पी0ओ0 का गठन करना, जिसमें उत्तर प्रदेश के अन्दर एक हजार एफ0पी0ओ0 के गठन के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया गया है।

उन्होंने कहा कि आजीविका मिशन ग्रामीण क्षेत्र में महिला समूहों को आगे बढ़ाने, उन्हें सम्मान के साथ स्वावलम्बन का जीवन गुजर-बसर करने और आत्मनिर्भर के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक बड़ी भूमिका का निर्वहन कर सकता है। उन्होंने कहा कि जब लॉक डाउन के दौरान लोग पलायन कर अपने घर आये तो ग्रामीण क्षेत्र में महिला आजीविका समूह द्वारा मास्क बनाने, पी0पी0ई0 किट बनाने सहित अन्य कार्यक्रमों के साथ जुड़कर अभियान चलाया गया, वह अत्यंत अभिनंदनीय रहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में नम्बर एक पर है। न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर किसानों की मदद भी उसी का परिणाम है। उत्तर प्रदेश आलू उत्पादन में नम्बर एक पर है। गन्ना उत्पादन में उत्तर प्रदेश फिर से नम्बर एक पर है। कोरोना कालखण्ड में प्रदेश की कोई चीनी मिल बन्द नहीं होने दी गयी। 119 चीनी मिलों को चलाया गया। गन्ना किसानों का विगत साढ़े चार वर्ष  में 1 लाख 45 हजार करोड़ रूपये का गन्ना मूल्य का भुगतान कराया गया। सरकार द्वारा हर स्तर पर किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के प्रयास किये गये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गेंहू का रिकॉर्ड क्रय करने के बाद वर्तमान धान क्रय की दिशा में प्रदेश सरकार मजबूती के साथ बढ़ी है। राज्य सरकार लगभग 5 हजार स्थानों पर क्रय केन्द्र स्थापित कर हर एक किसान की उपज को क्रय कर उसका मूल्य डी0बी0टी0 के माध्यम से किसानों के खाते में पूरी प्रतिबद्धता के साथ भेजने का कार्य कर रही है। किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य प्राप्त हो, यह सरकार का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि खेती-किसानी अब घाटे का सौदा नहीं रहेगी, बल्कि अन्नदाता किसान सम्मान पायेगा और उसके साथ बैंकर्स भी जुड़ जायेंगे। इनके साथ नाबार्ड जैसी संस्थाएं जुड़ जायेंगी तो चिन्ता की कोई बात नहीं रहेगी। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है। लगभग 60 प्रतिशत कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर जब वर्तमान सरकार ने ध्यान दिया तो देखते ही देखते परिवर्तन हुआ और उत्तर प्रदेश, देश की दूसरी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर कर सामने आया।

इस अवसर पर नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ0 डी0एस0 चौहान ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा एवं नाबार्ड के कार्यक्रमों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि सहित बैंकों के प्रतिनिधिगण, स्वयं सहायता समूहों के सदस्य एवं शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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