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पहलगाम हमले पर सख्त रुख से लेकर Iran-UAE की ऐतिहासिक सुलह तक, जानें ब्रिक्स समिट में कैसे चमका भारत का दबदबा

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि क्या दो सक्रिय युद्धों (यूक्रेन संकट और मध्य पूर्व तनाव) और सदस्य देशों के बीच गहराते मतभेदों के बावजूद एक सर्वसम्मत दृष्टिकोण बनाया जा सकता है। इसके अलावा, नई दिल्ली के सामने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी थी कि चीन और रूस की मौजूदगी के बावजूद ब्रिक्स (BRICS) को किसी स्पष्ट ‘अमेरिका-विरोधी’ मंच में न तब्दील होने दिया जाए। तमाम आशंकाओं को दरकिनार करते हुए 12 सितंबर को सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को अपना लिया। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रोफेसर जेफरी सैक्स ने इसे भारत की एक बड़ी संस्थागत सफलता करार देते हुए कहा कि नई दिल्ली ने अत्यंत चुनौतीपूर्ण समय में भी आम सहमति बनाकर अपनी कूटनीतिक क्षमता का लोहा मनवाया है।

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