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न्याय प्रक्रिया में पारिवारिक पक्ष पर सहृदयता से विचार करें-राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल

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प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज यहाँ लखनऊ हाईकोर्ट के आॅडीटोरियम में अवध बार एसोसिएशन द्वारा ‘‘रोल आफ वुमेन इन द फील्ड आफ लाॅ‘‘ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि सहभाग किया।

इस अवसर पर सम्बोधित करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि सामजिक संरचना में न्याय की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। अधिवक्ता न्याय प्रणाली का आवश्यक अंग है। उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली से जुड़े होने के कारण देश की स्वतंत्रता से लेकर समाज सुधार, राजनीति, संस्कृति जैसे क्षेत्रों में अधिवक्ताओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

सामान्य नागरिकों का न्याय पालिका पर भरोसा होने की चर्चा करते हुए राज्यपाल जी ने न्याय प्रक्रिया के सरल होने, महिलाओं और कमजोर वर्ग को सुगमता से न्याय मिलने और आम आदमी को समय से न्याय प्राप्त होने पर जोर दिया। उन्होंने इसी क्रम में न्याय प्रक्रिया में पारिवारिक पक्ष पर सहृदयतापूर्वक विचार करने का सरल संवेदनात्मक आग्रह भी किया।

राज्यपाल ने विधि क्षेत्र में महिला अधिवक्ताओं द्वारा दिए गए योगदान को सराहनीय बताते हुए कहा कि आज महिलाओं की क्षमता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि महिलाएं काम करती हैं तो बदलाव आता है। अब बेटियाँ अपना विकास कर रही हैं, जो भविष्य में एक बड़ा सामाजिक बदलाव लाएगा। उन्होंने कामकाजी दम्पत्तियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि महिलाएं दोहरा दायित्व उठा रही हैं, इसलिए पुरूषों को भी घरों में संयुक्त रूप से कार्य की जिम्मेदारी लेना चाहिए।

संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ न्यायाधीश उच्च न्यायालय इलाहाबाद श्रीमती सुनीता अग्रवाल ने उन महिला अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने न्याय के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाया और आगे इस क्षेत्र में महिलाओं को कार्य करने का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि पुरूष कार्यक्षेत्र में महिलाओं को प्रतिद्वन्दी नही, सहयोगी समझें।

उन्होंने बार एसोसिएशन से अपील की कि कोर्ट परिसर में किसी भी महिला अधिवक्ता से लैंगिंक भेदभाव को गम्भीरता से लें। कार्यक्षेत्र में महिला के व्यक्गित जीवन को लक्ष्य न करें, उसे एरोगेंट नाम न दें। महिला को उसके काम से पहचाने।

वरिष्ठ न्यायाधीश उच्च न्यायालय, लखनऊ बेंच श्री डी0के0 उपाध्याय ने अपने सम्बोधन में न्याय क्षेत्र में प्रारम्भ में विधि स्नातक महिलाओं के समक्ष भारतीय सामाजिक व्यवस्था के मद्देनजर आयी दिक्कतों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह साधन है, जिससे बंधनों को तोड़ा जा सकता है। उन्होंने सभी सामाजिक अवरोधों को शीशे की दीवार बताते हुए महिलाओं को शैक्षिक और कौशल विकास से इसे तोड़कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

समारोह में अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री ए0एम0 त्रिपाठी ने राज्यपाल जी को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल जी ने बटन दबाकर एसोसिएशन की ई-लाइब्रेरी तथा सेल्फी प्वाइंट, सौन्दर्यीकृत महामना सभागार, मीटिंग रूम तथा पंचवटी लान का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर अवध बार एसोशिएशन के उपाध्यक्ष श्री अनुज कुदेसिया, एसोशिएशन के महासचिव श्री मनोज कुमार मिश्रा, न्यायमूर्तिगण, एसोसिएशन के सभी सदस्यगण, हाईकोर्ट के अधिवक्तागण, तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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