धोखा-धड़ी

गुरमीत राम रहीम – नाम बड़े और दर्शन छोटे

“बाबा का कच्चा चिट्ठा”

अगर आप भारतवासी हैं तो आपने डेरा सच्चा सौदा के केस के बारे में ज़रूर सुना होगा, की कैसे राम रहीम का विशाल साम्राज्य उसके काले कारनामों की वजह से ढ़ेर हो गया। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम सिंह इंसान को विशेष CBI अदालत ने यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी करार दिया और 20 साल की कैद की सजा सुनाई। राम रहीम के किस्से यहीं खत्म नहीं होते।
MSG जैसी फ़िल्म में अपने आपको सचाई,अच्छाई और मानवता का प्रतीक बताने वाला राम रहीम असल में यौन उत्पीड़न का दोषी,हत्यारा,गैर कानूनी काम करने वाला और दंगे करवाने वाला एक दुर्दान्त अपराधी निकला। देर से ही सही परंतु अपने कर्मो की सजा उसको निचली अदालत से मिल ही गई।
राम रहीम पर ये मामला 2002 में दर्ज हुआ था। डेरा सच्चा सौदा का नाम और उसकी पकड़ इतनी गहरी थी कि सेलिब्रिटीज से लेकर बड़े-बड़े नेता भी उसके पास मदद, आशीर्वाद और निजी फायदों की लिए जाते थे। राम रहीम ने पैसे के दम पर और लोगों की आस्था से खिलवाड़ करते हुए अपना साम्राज्य इतना बढ़ाया कि उसकी झूठी छवि और ढ़कोसलों के सामने सभी उसके गुनाहों को नज़रअंदाज़ करते गये।
राम रहीम का राजनीतिक असर और प्रभाव इतना था कि जिस दिन उसके खिलाफ फैसला आया उस दिन उसके भक्तों या फिर यू कहें कि उसके “गुंडो” ने पंजाब, ह​रियाणा और दिल्ली में आग लगवा दी। एक अपराधी को बचाने के लिए उन लोगों ने दंगे भड़का दिए। जिसमें 30 से ज़्यादा लोगों की मृत्यु हो गई और तकरीबन 250 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जी हॅं, इतना खून खराबा एक अपराधी को बचाने के लिए हुआ। क्योंकि सदियों से राम रहीम ने लोगों की आंखों पर अन्धविश्वास और झूठी आस्था की काली पट्टी बांध कर रखी थी। जिसके पार उसके भक्तों के लिए कुछ भी देखना संभव नहीं था।
खैर, अब राम रहीम जेल के अन्दर है, और लोगों को देरी से ही सही पर इंसाफ जरूर नसीब हुआ। बाबा पर आया ये फैसला ये साबित करता है कि हमारे देश में कानून की पकड़ अभी भी मजबूत है। हमारा संविधान अभी भी सच के साथ खड़ा है। क्योंकि किसी का नाम कितना भी बड़ा हो अगर उसके दर्शन छोटे हैं तो उसे उसके कर्मो के सजा अवश्य मिलती है।

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