उत्तर प्रदेश

एलडीए में अलमारियां तोड़कर खोजी जा रही हैं फाइलें

[tta_listen_btn listen_text="खबर सुनें" pause_text="Pause" resume_text="Resume" replay_text="Replay" start_text="Start" stop_text="Stop"]

लखनऊ। एलडीए में सोमवार को भी प्राधिकरण के पुराने ब्लाक के प्रथम तल पर अलमारियों के ताले तोड़े गए। यहां से 600 से ज्यादा फाइलें बरामद हुई। यह सभी फाइलें उपयोगी बतायी जा रही है। मुख्यालय व लालबाग कार्यालय में अलमारियों से अभी तक 1700 से ज्यादा फाइलें मिल चुकी हैं। कहीं यह फाइलें आपकी तो नहीं है। यह जानने के लिए संबंधित संपत्ति विभाग से संपर्क कर जानकारी कर सकते हैं।

एलडीए के सचिव पवन गंगवार, संयुक्त सचिव ऋतु सुहास, संयुक्त सचिव डीएम कटियार ने अपनी मौजूदगी में प्रथम तल पर कई अलमारियां खुलवाई। कई अलमारियों के लॉक खुले थे तो कई के ताले तुड़वाने पड़े। बंद अलमारियों में करीब 600 से ज्यादा फाइलें बरामद हुई हैं। संयुक्त सचिव ऋतु सुहास ने बताया कि ज्यादातर फाइलें नेहरू इन्क्लेव योजना की है। इसके अलावा ट्रस्ट से संबंधित फाइलें हैं।

दूसरी तरफ बाबू को दिए गए कंप्यूटर गायब होने का मामला सामने आने पर सोमवार को छानबीन की गई। सचिव पवन गंगवार व संयुक्त सचिव डीएम कटियार ने प्रथम तल पर संपत्ति अनुभाग में सबंधित बाबू की अलमारी का लॉक तोड़ा गया। हालांकि इसमें कंप्यूटर नहीं निकला। कुछ फाइलें मिली हैं जो कि अनुपयोगी बतायी जा रही है। एक कंप्यूटर मोहम्मद हासिम नामक कनिष्ठ लिपिक को आवंटित था। जिसके जवाब में लंबे समय से अवकाश पर चल रहे। दूसरे लिपिक प्रांशु शुक्ला के पास कंप्यूटर होने की बात कही गई।

कमर्चारी हासिम ने बताया कि प्रांशु को उसके पते पर कई पत्राचार किया गया और उसके मोबाइल पर लगातार संपर्क करने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिल रहा है. संयुक्त सचिव ने बताया वह काफी समय से मेडिकल पर है. नोटिस जारी की जाएगी इसके बाद भी जवाब नहीं मिलता है तो बर्खास्तगी की कार्रवाई के लिए फाइल बढ़ायी जाएगी। उन्होंने बताया कंप्यूटर कोई बाहर नहीं ले गया है। मिसिंग है मिल जाएगी।

राज्‍यों से जुड़ी हर खबर और देश-दुनिया की ताजा खबरें पढ़ने के लिए नार्थ इंडिया स्टेट्समैन से जुड़े। साथ ही लेटेस्‍ट हि‍न्‍दी खबर से जुड़ी जानकारी के लि‍ये हमारा ऐप को डाउनलोड करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button