1870 में बकिंम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा कम्पोज की गई एक कविता है, जिसे उन्होंने 1881 में रचित अपने उपन्यास ‘आनन्द मठ में सम्मलित किया।इसका बंगाली प्रोननसियेशन वन्दे मातरम् है।
वन्दे मातरम् ने भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में बहुत बड़ा रोल अदा किया है। अक्टूबर 1937 में इसे नेशनल सॉन्ग के रूप में अपनाया गया है।
देवनागरी स्क्रिप्ट में यह कविता ऐसी है।
वन्दे मातरम्
सुजलाम् सुफलाम्
मलयज शीतलाम्
मातरम्।
वन्दे मातरम्।
शुभजयोत्स्नाम्
पुलकितयामिनीम्
फुल्लकुसुमित
द्रुमदल शोभिनीम्
सुहासिनीम्
सुमधुर भाषिणीम्
सुखदाम वरदाम्
मातरम्।
वन्दे मातरम्।
9 अगस्त को ‘भारत छोड़ो आन्दोलन की 75वीं वर्षगांठ पर भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी ने संसद का विशेष सत्र बुलाया है जिसमें आजादी के नायकों को विस्तार देगी मोदी सरकार।
मोहन दास करम चन्द गांधी और जवाहरलाल नेहरू, इससे कुछ अधिक हुआ तो भगत सिंह और चन्द्रशेखर आजाद तक सिमटी भारतीय स्वतन्त्रता संघर्ष की कहानी में अब आजादी के गुमनाम बना दिये गये नायकों का गान भी होगा, जिन्हें आम जनता के सामने अछूत बनाकर रखा गया।
नौ अगस्त को क्रान्ति दिवस के रूप में मनाये जाने की परम्परा को हम नौ अगस्त 1925 को लखनऊ के काकोरी काण्ड से जोड़कर देखने की भी हिम्मत करेंगे। 1925 में खजाने से भरी ट्रेन जो काकोरी रेलवे स्टेशन से सहारनपुर रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुई थी, उस ट्रेन से क्रान्तिकारियों ने खजाना लूटके अग्रेंजों को खुली चुनौती दी थी। इस दुस्साहसिक घटना के ठीक 17 साल बाद नौ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन के रूप में सविनय अवज्ञा आन्दोलन का ऐलान किया था।
आज नौ अगस्त 2017 के दिन लोकसभा अध्यक्ष, सुमित्रा महाजन संकल्प पढ़ेंगी और इसके बाद बीजेपी की ओर से चर्चा की शुरूआत की जायेगी। हाल ही में विदेश नीति पर अपने सारगर्भित एवं दमदार भाषण से देशवासियों की खुलकर तारीफ बटोरने वाली विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, लोकसभा में इस विशेष सत्र में चर्चा शुरू करेंगी। राज्यसभा में इस जिम्मेदारी का वहन करेंगे वित्त मंत्री अरूण जेटली, तत्पश्चात दिनभर पक्ष-विपक्ष के नेता चर्चा में हिस्सा लेंगे और फिर वाकपटु प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी शहीदों को श्रद्धांजलि के साथ इस विशेष सत्र की चर्चा का समापन करेंगे।
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