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मोदी के फोन घुमाने भर से रुक जाएगा युद्ध, UAE को भरोसा, मीडिल ईस्ट को जंग की आग से बचाने की उम्मीद भारत पर टिकी

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इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो उसके जवाब में ईरान ने ना सिर्फ इजराइल को निशाना बनाया बल्कि उसने पूरे मिडिल ईस्ट के देशों को अपने निशाने पर ले लिया। इसमें सबसे ज्यादा मिसाइलें और ड्रोन अटैक यूएई पर उसने किए। तमाम हमलों के बीच यूएई के लोग काफी जिंदा दिल नजर आए और वो लगातार होते इन हमलों के बीच अपना दैनिक काम जारी रखे हुए हैं। वो दबाव महसूस नहीं कर रहे हैं। वहीं यूएई की सरकार भी आम लोगों के साथ लगातार सड़कों पर उतर कर मुलाकात कर रही है और स्थिति को सामान्य बनाने का काम कर रही है। संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई साफ कह रहा है कि वह ईरान-इज़राइल संघर्ष में खिंचना नहीं चाहता और न ही वह अपनी जमीन को किसी भी पक्ष के लिए हमले का लॉन्चिंग पैड बनने देगा।

भारत में यूएई के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्ज़ा ने एनडीटीवी से कहा है कि सच कहूं तो मुझे समझ नहीं आता कि इस मामले में यूएई को क्यों घसीटा जा रहा है। इसमें शामिल होने की कोई वजह ही नहीं है। दरअसल अबू धाबी की स्थिति बेहद संवेदनशील है। एक तरफ वह ईरान का पड़ोसी है, तो दूसरी तरफ अब्राहम समझौते के तहत इज़राइल का साझेदार भी। लेकिन मिर्ज़ा के मुताबिक यही स्थिति यूएई को खास बनाती है। हम दोनों पक्षों के बीच बातचीत और समझौते की राह निकाल सकते हैं। जब बात भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आई, तो मिर्ज़ा ने कहा कि मोदी का सम्मान सिर्फ खाड़ी देशों के नेताओं में ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता और कारोबारी जगत में भी है।

यही भरोसा उन्हें इस संघर्ष में भी एक अहम मध्यस्थ बना सकता है। मिर्ज़ा ने कहा कि अगर मोदी जी ईरान और इज़राइल के नेताओं को सिर्फ एक फोन कॉल कर दें, तो यह मुद्दा सुलझ सकता है… यह टकराव खत्म हो सकता है। सिर्फ एक फोन कॉल। यह विश्वास प्रधानमंत्री मोदी के उन दोनों योद्धाओं के साथ मजबूत संबंधों पर आधारित है, जो वर्तमान में उस युद्ध में लड़ रहे हैं जिसे उन्होंने हमारी धरती पर लड़ा जा रहा युद्ध कहा है। मिर्जा ने कहा कि वे हमारी धरती पर आपस में लड़ रहे हैं। यह अस्वीकार्य है। वह नागरिक मार्ग में रहने के लिए सतर्क थे। मैं सैन्य अधिकारी नहीं हूं। उन्होंने कहा और आगे बताया कि अब तक हुए मामूली नुकसान की रिपोर्ट उनके आकलन के अनुसार सही है।

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