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संतों ने देश की संस्कृति, एकता को बनाए रखने और ज्ञान के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई : अमित शाह

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डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत के संतों ने देश की संस्कृति, एकता को बनाए रखने और ज्ञान के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

शाह ने कहा कि आजादी के बाद जब देश और सरकार पश्चिमी विचारों से प्रभावित होने लगी, तब जैन संत आचार्य विद्यासागर महाराज ही एकमात्र ऐसे संत थे, जिन्होंने भारत, भारतीयता, भारतीय संस्कृति, हमारे धर्म और हमारी भाषाओं को संरक्षण देने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि पूरे देश को एक करने का काम जैन आचार्यों और मुनियों ने किया है। शाह छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ शहर में आचार्य विद्यासागर जी महामुनिराज के ‘प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव’ को संबोधित कर रहे थे।

शाह ने कहा, ”हमारे देश की संत परंपरा बहुत समृद्ध है और जब भी भारत को जरूरत पड़ी है, संत परंपरा ने अपनी भूमिका निभाई है। गुलामी के कालखंड में संतों ने भक्ति भावना के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को जीवित रखा।”

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद जब सरकार और देश पश्चिमी विचारों से प्रभावित होने लगे, तब आचार्य जी ही एकमात्र ऐसे संत थे, जिन्होंने भारत, भारतीयता, भारतीय संस्कृति, हमारे धर्म, हमारी भाषाओं को संभाले रखा। शाह ने कहा कि आचार्य जी ने हमेशा गोधन, चरखा, हथकरघा और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दिया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश में इन सभी चीजों को बढ़ावा दिया है, जिसका मुख्य कारण आचार्य जी की प्रेरणा रही है। जैन संत आचार्य विद्यासागर ने पिछले वर्ष 18 फरवरी को डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी तीर्थ में सल्लेखना के बाद अंतिम सांस ली थी। सल्लेखना एक जैन धार्मिक प्रथा है, जिसमें आध्यात्मिक शुद्धि के लिए स्वैच्छिक मृत्यु तक उपवास किया जाता है।

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