पंचतंत्र

PanchTantra-कान भरने की कला भाग-17

और फिर उनके हाथ में यह किताब पकड़ा देते और वे इसे पूरा करते-करते अपने बाप को भी सलाह देने लायक हो जाते थे। इसकी इतनी धूम मची की यह देखते-देखते ईरान, तूरान, तजाकिस्तान और परिस्तान तक पहुंच गई और इसे वहां की जबानों में बदल लिया गया।

वहां के कवि और किस्सागी इसकी बराबरी करने के लिए पागल हो-हो कर किस्से गढऩे लगे और अपने नकली माल से भी इतना नाम कमाने लगे कि उनके उन्नीस पडऩे वाले किस्से भी दूसरी रचनाओं से इक्कीस माने जाने लगे।

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