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Modi Govt. ने Emergency Powers का किया उपयोग, कंपनियों को LPG Production बढ़ाने के दिये निर्देश

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पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है और इसका असर भारत में रसोई गैस की उपलब्धता तथा कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। एक ओर केंद्र सरकार ने आपात अधिकारों का उपयोग करते हुए देश की तेल शोधन कंपनियों को घरेलू रसोई गैस का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है, वहीं दूसरी ओर देश के कई हिस्सों में गैस सिलिंडर की आपूर्ति में देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी बीच घरेलू तथा वाणिज्यिक रसोई गैस सिलिंडर की कीमतों में भी वृद्धि कर दी गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ गया है।

हम आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने पांच मार्च को आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत आदेश जारी कर सभी सार्वजनिक और निजी तेल शोधन कंपनियों को रसोई गैस के उत्पादन को अधिकतम स्तर तक बढ़ाने को कहा है। सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण आपूर्ति मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे भारत को मिलने वाली गैस खेपों पर दबाव पड़ा है। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कमी न हो, इसके लिए देश में उपलब्ध संसाधनों से अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

हम आपको बता दें कि भारत में रसोई गैस का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से आता है। देश अपनी कुल आवश्यकता का लगभग साठ प्रतिशत गैस बाहर से खरीदता है। इनमें से करीब 85 से 90 प्रतिशत आयात फारस की खाड़ी क्षेत्र से होते हैं और उनका प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य है। वर्तमान संघर्ष के कारण इस मार्ग में बाधा उत्पन्न हो गई है, जिससे आपूर्ति की स्थिति संवेदनशील हो गई है। वित्त वर्ष 2025 में भारत में लगभग 31.3 मिलियन टन रसोई गैस की खपत हुई, जबकि देश में उत्पादन केवल 12.8 मिलियन टन ही रहा।

हम आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि तेल शोधन कंपनियां प्रोपेन और ब्यूटेन नामक गैस तत्वों का उपयोग अब किसी अन्य रसायनिक उत्पाद के निर्माण में नहीं कर सकेंगी। इन दोनों तत्वों से ही रसोई गैस तैयार की जाती है। आदेश के अनुसार इन गैस धाराओं को केवल रसोई गैस उत्पादन में लगाया जाएगा और तैयार गैस को केवल तीन सार्वजनिक क्षेत्र की विपणन कंपनियों भारत पेट्रोलियम, इंडियन आयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को ही आपूर्ति किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्राप्त गैस को केवल घरेलू रसोई उपयोग के लिए ही बेचा जा सकेगा। नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है।

केंद्र सरकार के अनुसार यह कदम देश के लगभग 33 करोड़ से अधिक सक्रिय रसोई गैस उपभोक्ताओं को निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके साथ ही भारत संघर्ष क्षेत्र से बाहर के देशों से भी गैस आयात के विकल्प तलाश रहा है। हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने अमेरिका से गैस आयात का समझौता किया है जिसके तहत 2026 में लगभग 2.2 मिलियन टन गैस की आपूर्ति की जाएगी। यह भारत के वार्षिक गैस आयात का लगभग दस प्रतिशत होगा और इससे ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने में मदद मिलेगी।

हम आपको यह भी बता दें कि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर भी कंपनियां प्राथमिकताओं में बदलाव कर रही हैं ताकि वाहन ईंधन, घरेलू रसोई और उर्वरक उद्योग जैसे आवश्यक क्षेत्रों में आपूर्ति बनी रहे। भारत में प्रतिदिन लगभग 195 मिलियन घन मीटर प्राकृतिक गैस की खपत होती है, जिसमें से आधे से अधिक हिस्से की पूर्ति आयात से होती है। मुख्य आपूर्तिकर्ता कतर द्वारा अपने गैस संयंत्र को बंद किए जाने और होर्मुज मार्ग बाधित होने से लगभग 60 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसके कारण कंपनियों को अन्य स्रोतों से गैस खरीदनी पड़ रही है।

इसी बीच ओडिशा के कई शहरों में रसोई गैस की आपूर्ति में देरी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। भुवनेश्वर और कटक जैसे शहरों में कई परिवारों को दूसरा सिलिंडर बुक कराने के बाद एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि पहले यह अवधि दो दिन से लेकर पंद्रह दिन तक होती थी। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इतनी लंबी देरी नहीं देखी, यहां तक कि हड़ताल या त्योहारों के समय भी ऐसी स्थिति नहीं बनी थी।

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