उत्तर प्रदेशफ्लैश न्यूज

हर महाविद्यालय में जरूरत के अनुसार ही पाठ्यक्रम, समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए निर्देश -राज्यपाल, श्रीमती आनंदीबेन पटेल

लखनऊ : 16 अप्रैल, 2026,
      प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज जन भवन स्थित गांधी सभागार में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर से संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई।
बैठक में राज्यपाल जी ने सभी महाविद्यालयों की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि अनेक महाविद्यालयों में शिक्षण एवं गैर-शिक्षण स्टाफ की कमी है, कई संस्थानों में छात्र नामांकन अत्यंत कम है, जबकि कुछ महाविद्यालय अत्यंत पुराने होने के बावजूद अपेक्षित छात्र संख्या आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं। भवन एवं आधारभूत सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।
इन परिस्थितियों पर राज्यपाल जी ने चिंता व्यक्त की और अपने गुजरात के कार्यकाल का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहाँ उन्होंने कमजोर सरकारी विद्यालयों के सुधार हेतु निजी संस्थाओं/प्राइवेट स्कूलों को “अडॉप्ट” करने की व्यवस्था लागू करवाई थी, जिसके परिणामस्वरूप शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ, छात्र संख्या में वृद्धि हुई तथा संस्थानों का समग्र प्रदर्शन बेहतर हुआ।
इसी क्रम में उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि उत्तर प्रदेश में भी इसी प्रकार की उत्तरदायित्व आधारित साझेदारी (पीपीपी) को अपनाने की दिशा में ठोस कार्यवाही की जाए, जिससे कि जिन महाविद्यालयों में संसाधनों की कमी, स्टाफ की न्यूनता अथवा नामांकन की समस्या है, वहाँ निजी संस्थाओं की सहभागिता से प्रभावी संचालन, बेहतर प्रबंधन तथा शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
इसके अतिरिक्त राज्यपाल जी ने यह महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया कि अध्यापकों के लिए महाविद्यालय के समीप आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ वहीं निवास कर सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि इस संबंध में उचित नियमावली बनाकर सुनियोजित ढंग से कार्यवाही की जाए, जिससे शिक्षकों की उपलब्धता, समयबद्धता एवं शैक्षणिक वातावरण में निरंतरता सुनिश्चित हो सके।
राज्यपाल जी ने कहा कि देश के विकास में तकनीकी दक्षता और कौशल की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने वर्तमान समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, स्थानीय आवश्यकताओं एवं विद्यार्थियों की मांग के अनुरूप ही पाठ्यक्रम संचालित करने तथा रोजगारपरक, कौशल आधारित एवं तकनीकी शिक्षा, को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) से संबंधित पाठ्यक्रम प्रारंभ किया जाय, जिससे विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा विश्व के सबसे ऊँचे चिनाब रेलवे पुल के उद्घाटन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ आधुनिक तकनीक एवं कौशल के बल पर ही संभव हो पाती हैं।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को निर्देश दिए कि वे भी अपने संस्थानों के विकास हेतु पूर्व नियोजन, ठोस कार्ययोजना निर्माण एवं दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएँ। प्रत्येक संस्थान को अपने लक्ष्य निर्धारित कर सुनियोजित परियोजनाओं के माध्यम से चरणबद्ध प्रगति सुनिश्चित करनी चाहिए, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता, संसाधनों का बेहतर उपयोग तथा संस्थानों की समग्र उन्नति संभव हो सके। विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए नवाचार, शोध, तकनीक एवं कौशल विकास को प्राथमिकता दें, जिससे वे राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
राज्यपाल जी ने अपने गुजरात कार्यकाल के महत्वपूर्ण अनुभवों को साझा करते हुए नर्मदा परियोजना के सफल क्रियान्वयन का उल्लेख किया और विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को पूर्व नियोजित, सुव्यवस्थित एवं लक्ष्य-आधारित कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश दिए।
राज्यपाल जी ने बताया कि उन्होंने राजस्व मंत्री तथा बाद में मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए नर्मदा परियोजना हेतु भूमि अधिग्रहण का कार्य अत्यंत कम समय में पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर एक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कार्य अनेक चुनौतियों एवं जटिलताओं के बावजूद सुदृढ़ योजना, समन्वय एवं प्रशासनिक दक्षता के बल पर संभव हो पाया। जिसके माध्यम से लंबे समय से जल संकट झेल रहे कच्छ के सूखा प्रभावित क्षेत्रों को नर्मदा का जल उपलब्ध कराया गया।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना वर्ष 1960 में प्रारंभ हुई थी और विभिन्न बाधाओं एवं संघर्षों के कारण वर्ष 2010 में पूर्ण हो सकी। इस दीर्घकालिक प्रक्रिया में अनेक प्रशासनिक, तकनीकी एवं सामाजिक चुनौतियाँ थीं, किन्तु सटीक योजना, निरंतर प्रयास एवं समन्वित कार्यशैली के कारण इसे सफलतापूर्वक पूरा किया जा सका। इतने बड़े और जटिल कार्य को किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए तथा न्यूनतम व्यवधान के साथ पूर्ण किया गया, जो कुशल प्रशासन एवं संवेदनशील दृष्टिकोण का उदाहरण है।
राज्यपाल जी ने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर को निर्देश दिए कि जनभवन की ओर से प्रदान की गई बसों का लाभ अधिकतम रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को मिलना चाहिए, जिससे उनकी शैक्षणिक भागीदारी एवं नामांकन में वृद्धि हो सके। विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान एवं अनुभव को बढ़ाने के उद्देश्य से प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को उन्हें विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया जाए।
विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष भर आयोजित किए गए कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण तैयार किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि विद्यार्थियों को कहाँ-कहाँ ले जाया गया, उन्होंने वहाँ क्या देखा, क्या सीखा तथा उसका उनके ज्ञान पर क्या प्रभाव पड़ा। साथ ही यह भी प्रस्तुत किया जाए कि इन प्रयासों से विद्यार्थियों की संख्या में कितनी वृद्धि हुई।
राज्यपाल जी ने महाविद्यालयों में शोध कार्यों को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उससे प्रेरणा लेकर शोध कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि शोध कार्यों का पेटेंट कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के नवाचारों को वैश्विक पहचान मिल सके। इस संदर्भ में उन्होंने टेक्नोलॉजी के अधिकाधिक उपयोग पर भी बल दिया।
राज्यपाल जी ने यह भी निर्देशित किया कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय अपने विकास कार्यों के लिए स्पष्ट रूपरेखा तैयार करें, समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करें तथा परिणामों का नियमित मूल्यांकन करें, जिससे उन्हें निरंतर आगे बढ़ाया जा सके।
राज्यपाल जी ने महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों की समीक्षा के दौरान छात्राओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार एवं समग्र विकास पर विशेष बल देते हुए निर्देश दिया कि छात्रावासों में रह रही छात्राओं का विशेष ध्यान रखा जाए, क्योंकि छोटी-छोटी गलतियों के कारण बच्चों का जीवन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि छात्राओं को निरंतर प्रेरित, शिक्षित एवं जागरूक किया जाए, ताकि वे किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधियों में न उलझें। इसके साथ ही उन्होंने छात्राओं के स्वास्थ्य एवं पोषण (पोषण स्तर) पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ एवं सशक्त बेटियाँ ही भविष्य में एक आदर्श समाज एवं परिवार का निर्माण करती हैं। इसी दृष्टिकोण से उन्होंने महाविद्यालयों में गर्भ संस्कार जैसे कार्यक्रम प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए, जिससे विद्यार्थियों में नैतिकता, संस्कार एवं जीवन मूल्यों का विकास हो सके। उन्होंने बाल गृहों में रह रही बालिकाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय अपने स्तर पर संस्कार, शिक्षा एवं मार्गदर्शन की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करें, तो ऐसी परिस्थितियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों को बहुभाषी ज्ञान प्रदान करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी में विदेशी छात्र भी संस्कृत सीखने आते हैं, अतः प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भी विभिन्न भाषाओं के अध्ययन-अध्यापन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
इसके अतिरिक्त उन्होंने विद्यार्थियों के शैक्षिक भ्रमण को अनिवार्य रूप से प्रोत्साहित करने के निर्देश देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को विभिन्न ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक स्थलों का भ्रमण कराया जाए, जिससे उनके ज्ञान, दृष्टिकोण एवं अनुभव में वृद्धि हो। बैठक के दौरान अधिकारियों एवं शिक्षण संस्थानों को परिश्रम, उत्तरदायित्व एवं कार्यकुशलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
राज्यपाल जी ने सभी को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी निरंतर कार्य करते हैं और अपने कर्तव्यों के प्रति पूर्णतः समर्पित रहते हैं। सभी अधिकारियों एवं शिक्षकों को उनसे प्रेरणा लेकर निष्ठा एवं परिश्रम के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए, जिससे संस्थानों की कार्यक्षमता एवं गुणवत्ता में सुधार हो सके।
उन्होंने महाविद्यालयों को निर्देश दिए कि वे अपने संस्थानों की कमियों एवं आवश्यक सुविधाओं की जानकारी समय-समय पर साझा करें, ताकि उन समस्याओं का समयबद्ध एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। राज्यपाल जी ने उच्च शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से यह समीक्षा करें कि कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं तथा उनमें से कितनी का समाधान किया गया। वे प्रत्येक महाविद्यालय की समस्याओं का स्थलवार विश्लेषण कर कार्ययोजना तैयार करें तथा शीघ्र ही सुधारात्मक कार्यवाही प्रारंभ करें, जिससे प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों को सुदृढ़, आकर्षक एवं गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सके।
विशेष कार्याधिकारी राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं अध्यापकों को जन भवन में संचालित हो रहे नवाचारों की विस्तृत जानकारी प्रदान की तथा उन्हें प्रेरित किया कि वे भी अपने-अपने संस्थानों में इसी प्रकार के नवाचारात्मक प्रयास निरंतर करते रहें, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता एवं संस्थागत विकास को नई दिशा मिल सके।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो0 कविता शाह ने राज्यपाल जी के मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सुझावों एवं प्रेरणा से निरंतर नई दिशा प्राप्त होती है तथा उनके मार्गदर्शन में प्रदेश के विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षा क्षेत्र निरंतर प्रगति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल जी के निर्देशन से कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित हो रहा है। कुलपति ने महाविद्यालयों को यह महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया कि वे अपने संस्थान के नाम के साथ “सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर” का नाम अनिवार्य रूप से अंकित करें, जिससे विश्वविद्यालय की पहचान सुदृढ़ हो तथा महाविद्यालयों की विश्वसनीयता एवं संस्थागत प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सके।
इस अवसर पर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर से संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य, अध्यापक, राजभवन के अधिकारी एवं कर्मचारी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
————

Related Articles

Back to top button

mahjong ways

slot777