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Edible Oil Price: सोयाबीन मजबूत फिर भी तेल सस्ता, बिनौला 400 रुपये टूटा; जानें बाजार का पूरा हाल

 घरेलू बाजार में कम आवक के बीच बीते सप्ताह सोयाबीन तिलहन की कीमतों में मामूली सुधार दर्ज किया गया। औद्योगिक मांग बढ़ने से कच्चे पाम तेल (सीपीओ) और पामोलीन के भाव भी मजबूत हुए। दूसरी ओर, आयातकों की लागत से नीचे बिकवाली के कारण सोयाबीन तेल के दाम में गिरावट आई। ऊंची कीमतों पर मांग कमजोर रहने से बिनौला तेल भी सस्ता हुआ। सुस्त कारोबार के बीच सरसों और मूंगफली तेल-तिलहन के भाव स्थिर रहे।

बाजार सूत्रों के मुताबिक, मंडियों में सोयाबीन की आवक फिलहाल काफी कम है। सप्ताहांत में इसकी आवक घटकर 40-45 हजार बोरी रह गई, जबकि रोजाना की मांग 2.5-3 लाख बोरी के आसपास है। कम आवक और त्योहारी मांग के चलते बीते सप्ताह सोयाबीन तिलहन के भाव पिछले सप्ताहांत के मुकाबले थोड़ा सुधरे।

लागत से नीचे बेच रहे आयातक

सूत्रों ने बताया कि दूसरी ओर आयातक अपने बैंक ऋण साख-पत्र (एलसी) को चालू रखने के लिए लगातार बिकवाली कर रहे हैं। बताया गया कि एलसी को चलायमान रखने के लिए वे करीब पांच प्रतिशत तक लागत से नीचे अपने सौदे बेचने को मजबूर हैं।

आयातकों के लिए सोयाबीन डीगम तेल की आयात लागत करीब 125 रुपये प्रति किलो बैठती है, जबकि वे इसे करीब 118.50 रुपये प्रति किलो के भाव बेच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, जिस देश में खाद्य तेल की करीब 60 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी होती है, वहां आयातकों का लागत से नीचे खाद्य तेल बेचना उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव को दर्शाता है।

सूत्रों का कहना है कि सरकार एक तरफ विदेशी मुद्रा बचाने की मंशा जताती है, लेकिन दूसरी तरफ आयातकों की लागत से नीचे हो रही बिकवाली की ओर संभवत: पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

बिनौला तेल में 400 रुपये की गिरावट

ऊंचे भाव पर मांग कमजोर रहने के कारण बीते सप्ताह बिनौला तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। औद्योगिक मांग मौजूद होने के बावजूद ऊंची कीमतों पर कारोबार प्रभावित रहा। इसके चलते बिनौला तेल 400 रुपये टूटकर 16,500 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

वहीं, बढ़ती औद्योगिक मांग और सूरजमुखी, मूंगफली तथा बिनौला जैसे अन्य खाद्य तेलों की तुलना में पाम-पामोलीन के सस्ता होने से इन तेलों की कीमतों में सुधार आया।

सरसों और मूंगफली के भाव स्थिर

ऊंचे दाम पर कारोबार सुस्त रहने के बीच बीते सप्ताह सरसों और मूंगफली तेल-तिलहन की कीमतें स्थिर बनी रहीं।

  • सरसों दाना: 8,300-8,350 रुपये प्रति क्विंटल
  • सरसों तेल दादरी: 16,800 रुपये प्रति क्विंटल
  • सरसों पक्की घानी: 2,735-2,835 रुपये प्रति टिन (15 किलो)
  • सरसों कच्ची घानी: 2,735-2,885 रुपये प्रति टिन (15 किलो)
सोयाबीन दाना और लूज के भाव बढ़े

समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज के थोक भाव में 25-25 रुपये प्रति क्विंटल का सुधार हुआ। इनके भाव क्रमश: 6,700-6,750 रुपये और 6,550-6,650 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।

इसके विपरीत, आयातकों की लागत से नीचे बिकवाली के कारण दिल्ली में सोयाबीन तेल 150 रुपये गिरकर 15,600 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन इंदौर तेल 150 रुपये घटकर 15,400 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल 200 रुपये टूटकर 11,850 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

मूंगफली तेल-तिलहन में नहीं आया बदलाव

बीते सप्ताह मूंगफली तिलहन का भाव 7,350-7,925 रुपये प्रति क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 17,000 रुपये प्रति क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,680-2,980 रुपये प्रति टिन पर स्थिर रहा।

सीपीओ और पामोलीन के दाम मजबूत

समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल 150 रुपये सुधरकर 14,100 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। इसी तरह पामोलीन दिल्ली 150 रुपये बढ़कर 16,000 रुपये प्रति क्विंटल और पामोलीन एक्स कांडला 100 रुपये सुधरकर 14,700 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

इस तरह बीते सप्ताह खाद्य तेल बाजार में कमोडिटी के हिसाब से अलग-अलग रुख देखने को मिला। कम आवक से सोयाबीन तिलहन को समर्थन मिला, जबकि आयातकों की लागत से नीचे बिक्री ने सोयाबीन तेल पर दबाव बनाया। बिनौला तेल में ऊंची कीमतों के कारण मांग कमजोर रही, वहीं औद्योगिक मांग से सीपीओ और पामोलीन को मजबूती मिली।

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