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अब ग्लोबल मार्केट में दिग्गज कंपनियों को टक्कर देंगी UP की दीदियां, 543 प्रेरणा सरस स्टोर से बदलेगी तस्वीर

उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को अब अपने उत्पादों के लिए गांव और स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा। स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रदेश में 543 प्रेरणा सरस स्टोर स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही 3,000 से अधिक उत्पादों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तैयार की जा रही इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण महिला उद्यमियों के उत्पादों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और डिजिटल बिक्री से जोड़ना है। अब स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद ओएनडीसी, ई-सरस, प्रेरणा मार्ट, मीशो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े बाजार तक पहुंच सकेंगे।

543 प्रेरणा सरस स्टोर बने बिक्री का माध्यम

जनपद और ब्लॉक स्तर पर स्थापित प्रेरणा सरस स्टोर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के उत्पादों को स्थानीय स्तर पर व्यवस्थित बाजार उपलब्ध करा रहे हैं। इन स्टोर के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार उत्पादों को एक जगह प्रदर्शित करने और ग्राहकों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

सरकार की कोशिश है कि महिलाओं को सिर्फ उत्पाद तैयार करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें उत्पादन से लेकर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया से जोड़ा जाए। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार में अलग पहचान बनाने का अवसर मिलेगा।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच

ग्रामीण उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी जोर दिया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को ओएनडीसी, ई-सरस, प्रेरणा मार्ट, मीशो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

इस व्यवस्था से किसी गांव या जिले में तैयार होने वाला खास उत्पाद स्थानीय बाजार से बाहर निकलकर देश के दूसरे हिस्सों के ग्राहकों तक पहुंच सकेगा। खास तौर पर किसी क्षेत्र की पहचान से जुड़े उत्पादों के लिए डिजिटल बाजार नए ग्राहक उपलब्ध कराने का माध्यम बन सकता है।

बिजनौर में ऑनलाइन मार्केटिंग की शुरुआत

डिजिटल बाजार की दिशा में बिजनौर राज्य एग्रीगेशन सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन विपणन का काम शुरू किया जा चुका है। अलग-अलग स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को एक मंच पर लाकर उनकी बिक्री और बाजार तक पहुंच को व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे ग्रामीण उत्पादों को दूर बैठे ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही समूहों को अपने उत्पादों की मांग और ग्राहकों की पसंद को समझने का अवसर मिलेगा।

सिर्फ बिक्री नहीं, ब्रांड वैल्यू पर भी जोर

स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए बाजार से जुड़ाव केवल बिक्री बढ़ाने का जरिया नहीं है। इसके जरिए उनके उत्पादों की पहचान और ब्रांड वैल्यू तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर है। बाजार से जुड़ने पर महिलाएं अपने उत्पादों की मांग को समझकर उत्पादन और विपणन की रणनीति तय कर सकती हैं।

गांव की ‘दीदियों’ के कारोबार को मिलेगा विस्तार

उत्पादन के साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था मजबूत होने से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के छोटे उद्यमों को विस्तार का अवसर मिल रहा है। प्रेरणा सरस स्टोर और डिजिटल प्लेटफॉर्म इस पूरी व्यवस्था में उत्पादन और बाजार के बीच कड़ी का काम कर रहे हैं।

3,000 से अधिक उत्पादों, 543 प्रेरणा सरस स्टोर और ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के स्थानीय हुनर को बड़े बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इससे गांव में तैयार उत्पादों के लिए स्थानीय बाजार के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंच का रास्ता खुल रहा है।

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