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गोमती पुस्तक महोत्सव गूंजा भक्ति संगीत… AI पर विस्तृत चर्चा, नई सदी की रचनात्मकता विषय पर की गई बात

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लखनऊ विश्वविद्यालय में चल रहे गोमती पुस्तक महोत्सव के तीसरे दिन पाठकों ने विभिन्न भाषाओं व शैलियों की पुस्तकों को देखा-परखा और खरीदा। बच्चों के लिए डूडल कार्यशालाओं से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ई-पुस्तकों पर चर्चाओं और भक्ति संगीत की सुरीली शाम तक यह उत्सव हर उम्र के पाठकों के लिए साहित्य, सृजनात्मकता और संस्कृति का रंगीन संगम प्रस्तुत कर रहा है।

बच्चों के पवेलियन में कार्टून

बच्चों के पवेलियन में सैकड़ों बच्चों ने टीम डूडल की दो दिवसीय कार्यशाला चित्रोत्सव – ड्रॉ, डूडल, डिस्कवर में पेंसिल और रंग के साथ कार्टून की जादुई दुनिया में कदम रखा। प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट और चित्रकार अजीत नारायण और उनकी टीम ने स्कूली बच्चों को दो घंटे की एक रचनात्मक यात्रा पर ले जाकर उन्हें नई कलात्मक विधाओं से परिचित कराया।

एआई दोस्त है या चुनौती

महोत्सव में साहित्यिक संवाद के पहले सत्र में कृत्रिम बौद्धिकता : नई सदी की रचनात्मकता विषय पर चर्चा हुई। इस सत्र में आइसेक्ट के संस्थापक एवं वरिष्ठ साहित्यकार संतोष चौबे से योगिता यादव ने संवाद किया। 1980 के दशक को याद करते हुए चौबे ने उस दौर के अनुभवों, जन भावनाओं और स्वीकार्यता की चुनौतियों को वैसा ही बताया जैसा आज एआई को लेकर है। उन्होंने एआई को इस्तेमाल करने के सहायक एप्लिकेशन्स और इनके विवेकपूर्ण इस्तेमाल की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि आज लोग एआई से दोस्ती और साथ की तलाश कर रहे हैं। यह संवाद कर सकता है और मित्र जैसा लग सकता है, लेकिन इस पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहिए। यह साथी हो सकता है, पर निर्णय हमेशा हमारा होना चाहिए।

शाम होते ही भक्ति सुरों से गूंज उठा महोत्सव

सूर्यास्त के साथ ही लखनऊ विश्वविद्यालय का प्रांगण सगुण और निर्गुण भक्ति धारा की संगीतमय संध्या से जीवंत हो उठा। इसमें ग्वालियर घराने के प्रख्यात हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित सुजीत कुमार ओझा ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। 18 वर्षों से देश-विदेश में प्रदर्शन कर चुके पंडित ओझा गंधर्व महाविद्यालय में अध्यापक, मिर्ची म्यूजिक अवॉर्ड्स के निर्णायक और द मोक्ष ग्रुप के संस्थापक हैं। उनके भक्ति-रस में डूबे सुरों ने सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अवधी के लिए उठी अकादमी की मांग

उत्तर प्रदेश के 32 जिलों में बोली जाने वाली अवधी को संरक्षित और संवर्धित करने के लिए हिंदी और अवधी विद्वानों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रदेश में अवधी अकादमी स्थापित करने की मांग उठाई है। रविवार को महोत्सव में अवधी पर चर्चा के दौरान हिंदी के प्रख्यात विद्वान डॉ. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने यह मांग रखी जिसका मंच पर बैठे अन्य विद्वानों ने भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश बहुभाषी राज्य है। प्रदेश में उर्दू, पंजाबी और भोजपुरी की अकादमी है लेकिन अवधी की अकादमी का गठन होना आवश्यक है जिससे अवधी को और समृद्ध किया जा सके।

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