विश्‍व

China के हाथ लगी अमेरिका की सबसे बड़ी कमजोरी, असली खेल अब शुरू!

[tta_listen_btn listen_text="खबर सुनें" pause_text="Pause" resume_text="Resume" replay_text="Replay" start_text="Start" stop_text="Stop"]

दुनिया का ध्यान ईरान और अमेरिका के तनाव पर है। लेकिन इस संघर्ष के पीछे एक ऐसा खिलाड़ी है जो बिना एक भी गोली चलाए इस जंग को जीत रहा है। वो खिलाड़ी है चीन। जानकारों का मानना है कि संघर्ष में अमेरिका को एक ऐसा गहरा जख्म मिला है जिसकी भरपाई करने में शायद उसे कई दशक लग जाए। चीन ने वो कर दिखाया जो रूस यूक्रेन युद्ध में भी मुमकिन नहीं हो पाया था। चीन की निगाहें अब जमीन पर नहीं बल्कि अंतरिक्ष से अमेरिका के हर कदम को ट्रैक कर रही हैं। अमेरिकी सेना की हर हरकत, उनके जहाजों की पल-पल की पोजीशन और उनके अत्याधुनिक हथियारों की मारक क्षमता अब चीन के लिए कोई राज नहीं रही।

दरअसल चीन ने अपने लो अर्थ ऑर्बिट यानी एलईओ सेटेलाइट्स के जरिए अमेरिका की मिलिट्री डॉक्ट्रिन यानी युद्ध लड़ने के तरीके का एक पूरा एनसाइक्लोपीडिया तैयार कर लिया है। यह महज डाटा नहीं है बल्कि भविष्य में होने वाले किसी भी वैश्विक टकराव के लिए चीन का सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र है। जब दुनिया ईरान के मिसाइल हमलों को देख रही थी तब बीजिंग में बैठे वैज्ञानिक अमेरिकी रिएक्शन के हर सेकंड का हिसाब लगा रहे थे। चीन फिलहाल कम से कम तीन बड़े सेटेलाइट नेटवर्क ऑपरेट कर रहा है। जिनमें 300 से ज्यादा जासूसी सेटेलाइट्स शामिल हैं। लेकिन जेलन वन इनमें सबसे घातक है।

क्योंकि यह सेटेलाइट्स 4K अल्ट्रा एचडी वीडियो कैप्चर करने में सक्षम है। आप सोचिए हजारों किलोमीटर ऊपर से चीन अमेरिका के एयरबेस की ऐसी तस्वीरें देख रहा है जैसे कोई खिड़की से बाहर झांक रहा हो। इन तस्वीरों से यह साफ हो गया है कि चीन अब हर छोटी से छोटी जानकारी जुटा रहा है। अमेरिकी एयरक्राफ्ट करियर किस एंगल से मुड़ते हैं। उनके लड़ाकू विमानों में रिफ्यूलिंग का सटीक समय क्या है और एक हमले के बाद दूसरा हमला करने के बीच अमेरिकी फौज कितना वक्त लेती है? यह वो डाटा है जो चीन के युद्ध की प्लानिंग में अमेरिका से कई दशक आगे ले जा सकता है। चीन ने इस पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों का डाटा सार्वजनिक कर दिया। जमीन पर कौन सा विमान खड़ा है? उसका मॉडल क्या है और उनकी सटीक संख्या कितनी है? यह सब अब चीन की फाइलों में दर्ज है। लेकिन खेल इससे भी गहरा है। जब ईरान की तरफ से मिसाइलें दागी गई तो चीन के सेटेलाइट्स ने अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम के रिएक्शन टाइम को नाप लिया।

अमेरिका की मिसाइलें किस रास्ते से आती हैं? उनके रडार कितनी देर में लॉक हो रहे हैं? और सबसे बड़ी बात एक मिसाइल दागने के बाद सिस्टम को दोबारा प्रोग्राम करने में कितना वक्त लगता है? चीन ने यह सब रिकॉर्ड कर लिया है। इसका मतलब यह है कि भविष्य में अगर चीन और अमेरिका के बीच टकराव होता है तो चीन को पहले से पता होगा कि अमेरिका के डिफेंस सिस्टम में लूप होल कहां है और उसे कैसे भेदना है। यह महज जासूसी नहीं है।

यह अमेरिका की सामरिक सुरक्षा किड नी पर सीधा प्रहार है। दशकों तक अमेरिका की ताकत, उसका सरप्राइज़ एलिमेंट और उसकी अजय तकनीक रही है। लेकिन चीन के इस डाटा माइनिंग से उन रहस्य को खत्म कर दिया है। जानकारों का कहना है कि जो जानकारी चीन ने इन चंद महीनों में जुटाई है उसे हासिल करने में पारंपरिक जासूसी के जरिए 50 साल लग जाते चीन अब जानता है कि अमेरिका कैसे सोचता है और कैसे लड़ता है तो क्या अमेरिका इस नुकसान की भरपाई कर पाएगा।

राज्‍यों से जुड़ी हर खबर और देश-दुनिया की ताजा खबरें पढ़ने के लिए नार्थ इंडिया स्टेट्समैन से जुड़े। साथ ही लेटेस्‍ट हि‍न्‍दी खबर से जुड़ी जानकारी के लि‍ये हमारा ऐप को डाउनलोड करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button