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72 साल बाद विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचा स्विट्जरलैंड, पेनल्टी शूटआउट में कोलंबिया को चटाई धूल, अर्जेंटीना से होगी भिड़ंत

स्विट्जरलैंड ने फुटबॉल इतिहास में मंगलवार को एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया। बेहद रोमांचक और सांसें रोक देने वाले नॉकआउट मुकाबले में स्विट्जरलैंड ने कोलंबिया को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से हराकर पूरे 72 साल बाद फीफा विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। निर्धारित और अतिरिक्त समय तक दोनों टीमों के बीच मुकाबला गोलरहित (0-0) ड्रा रहने के बाद मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ, जहां स्विस टीम ने अपने धैर्य के दम पर बाजी मार ली। स्विट्जरलैंड की इस ऐतिहासिक जीत के नायक रुबेन वर्गास रहे, जिन्होंने निर्णायक पेनल्टी को गोल में बदलकर अपनी टीम को अंतिम आठ का टिकट दिलाया। स्विट्जरलैंड इससे पहले आखिरी बार 1954 में विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचा था, जब उसने खुद इस महाकुंभ की मेजबानी की थी।

कोबेल ने कहा, ‘‘दर्शकों का समर्थन उनके पक्ष में था, इसलिए हमारे लिए यह एक कठिन मुकाबला था। हम जानते हैं कि खेल के कुछ ऐसे क्षण थे जब हमें रक्षात्मक खेल खेलना था और मानसिक रूप से मजबूत रहना था। हमारे कुछ खिलाड़ी अनुपस्थित थे, इसलिए यह हमारे लिए एक बड़ी चुनौती थी।’’ कोलंबिया 2014 में ब्राजील में खेले गए विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचा था लेकिन इस बार उसे राउंड ऑफ 16 से ही वापस लौटना होगा।

कोलंबिया के मिडफील्डर जॉन एरियस ने कहा, ‘‘यह सपना बहुत बड़ा था। देश ने हमें दिखाया कि उसे हम पर भरोसा है। वह हर पल हमारे साथ है। इससे पराजय की पीड़ा और बढ़ जाती है।’’ स्विट्जरलैंड की टीम पिछले तीन विश्व कप के अंतिम 16 में पहुंची थी लेकिन उससे आगे बढ़ने में नाकाम रही थी। स्विट्जरलैंड के कोच मूरत याकिन ने कहा, ‘‘ क्वार्टरफाइनल में स्विट्जरलैंड बनाम अर्जेंटीना। मैं बहुत उत्साहित हूं।’’ यह मैच दो विपरीत खेल शैलियों वाली टीमों के बीच कड़ा मुकाबला था। स्विट्जरलैंड की खेल शैली अधिक संगठित और सुनियोजित थी, जबकि कोलंबिया की खेल शैली अधिक आक्रामक और शारीरिक थी। स्विट्जरलैंड ने गेंद पर अधिक नियंत्रण बनाए रखा था। दोनों टीम को मैच में कुछ मौके मिले लेकिन वह उनका फायदा नहीं उठा पाई।

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