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हर नगर की महायोजना में 15-16 प्रतिशत हरित क्षेत्र आरक्षित हो

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर आहूत एक उच्चस्तरीय बैठक में गोरखपुर, वाराणसी, मथुरा-वृन्दावन के सुनियोजित विकास के लिए सम्बन्धित विकास प्राधिकरणों द्वारा तैयार जी0आई0एस0 बेस्ड महायोजना-2031 का अवलोकन किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर, वाराणसी और मथुरा-वृन्दावन जैसे धार्मिक नगरों की पहचान जिन मंदिरों अथवा अन्य प्रतिष्ठित भवनों से है, उनकी प्राचीनता एवं ऐतिहासिकता को बनाये रखने हेतु उनके आसपास उस भवन/मंदिर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों के निर्माण की स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए। इस व्यवस्था को महायोजना में शामिल करें।

मुख्यमंत्री ने अलग-अलग नगरों की महायोजना पर विचार करते हुए कहा कि नगरों में यातायात प्रबन्धन एक महत्वपूर्ण विषय है। हमें इसके लिए ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है। शहर में इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन को वरीयता दें। परम्परागत ईंधन वाली बसों  को यथासम्भव नगर से बाहर ही रखा जाए। मल्टीलेवल पार्किंग के लिए उपयुक्त स्थान निर्धारित करें।

प्रदेश के हर बड़े नगर में अपार सम्भावनाएं हैं। यू0पी0 ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 से हर जनपद में बड़ा निवेश आया है। ऐसे में मथुरा-वृन्दावन, गोरखपुर, वाराणसी की महायोजना में मेडिसिटी, स्पोर्ट्स सिटी, एजुकेशन सिटी, कन्वेशन सेंटर आदि के लिए स्पष्ट क्षेत्र चिन्हित करते हुये व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि हर नगर की महायोजना में 15-16 प्रतिशत क्षेत्र हरित क्षेत्र के लिए आरक्षित हो। जहां कहीं भी ग्रीन बेल्ट है, वहां किसी भी दशा में नई कॉलोनी न बसने पाए। इस निर्देश को महायोजना में शामिल करें।

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