कच्चे तेल की तेजी और अमेरिका-ईरान तनाव का असर, सेंसेक्स 173 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
मुंबईः पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती कारोबार में दबाव देखने को मिला। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ खुले।
बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 172.77 अंक यानी करीब 0.23 प्रतिशत गिरकर 76,342.66 अंक पर पहुंच गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी 63.30 अंक टूटकर 23,832.60 अंक पर कारोबार कर रहा था।
आईटी और टाटा समूह के शेयरों पर दबाव
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में शुरुआती कारोबार के दौरान इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टाटा स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
इसके विपरीत इटर्नल, भारती एयरटेल, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और लार्सन एंड टुब्रो के शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख
एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में सोमवार को मिला-जुला रुख रहा। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 3.36 प्रतिशत और जापान का निक्की 225 सूचकांक 1.83 प्रतिशत बढ़कर कारोबार कर रहा था।
वहीं चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए थे।
ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी घरेलू बाजार की चिंता बढ़ाई है। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.78 प्रतिशत बढ़कर 97 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। इसी वजह से निवेशक तेल कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
एफआईआई की बिकवाली जारी
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में 3,111.94 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिक्री की।
हालांकि, शुक्रवार के कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ था। उस दिन सेंसेक्स 362.57 अंक और निफ्टी 24.25 अंक की बढ़त पर बंद हुआ था।
अब सोमवार के कारोबार में निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बन रहे संकेतों पर रहेगी।



