भारत

अब सस्ती होंगी जांच… नई तकनीक विकसित करेगा IIT कानपुर, गेट्स फाउंडेशन से मिलाया हाथ

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर ने अपने उद्योग-अकादमिक एवं नवाचार सम्मेलन ‘आईआईटीके समन्वय 2026’ के तीसरे संस्करण का नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में समापन किया। सम्मेलन में उद्योग, सरकार और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों ने अनुसंधान, तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने के साथ उद्योग एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत करने पर चर्चा की। इस दौरान आईआईटी कानपुर और गेट्स फाउंडेशन ने स्थानीय स्तर पर विकसित किफायती डायग्नोस्टिक यानी नैदानिक समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए साझेदारी की घोषणा की।

सम्मेलन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनकी उपस्थिति में हुई इस साझेदारी का उद्देश्य भारत के विज्ञान एवं नवाचार तंत्र को मजबूत करना और किफायती स्वास्थ्य जांच समाधानों के विकास को गति देना है।

‘प्रयोगशाला से वास्तविक उत्पाद तक पहुंचाना जरूरी’

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि समन्वय अकादमिक जगत, अनुसंधान और उद्योग से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी, क्वांटम टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकें अगली औद्योगिक क्रांति में अहम भूमिका निभाएंगी। भारत भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अनुसंधान को प्रयोगशाला से बाहर निकालकर वास्तविक उत्पादों में बदलने के लिए दीर्घकालिक साझेदारियां जरूरी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि समन्वय जैसे मंच विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देंगे।

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर IIT कानपुर का जोर

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी वैज्ञानिक ज्ञान को ऐसे समाधानों में बदलना है, जो लोगों के जीवन को बेहतर बना सकें। संस्थान अनुसंधान, उद्यमिता और उद्योग को जोड़कर राष्ट्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों के समाधान विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि गेट्स फाउंडेशन के साथ साझेदारी इसी प्रयास का हिस्सा है। स्थानीय स्तर पर विकसित किफायती डायग्नोस्टिक समाधानों को आगे बढ़ाने से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। समन्वय के जरिए ऐसे विचारों और तकनीकों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिनका लाभ जरूरतमंद समुदायों को मिल सके।

वंचित समुदायों तक पहुंचेगी किफायती स्वास्थ्य तकनीक

गेट्स फाउंडेशन की इंडिया कंट्री डायरेक्टर अर्चना व्यास ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और विनिर्माण क्षमता किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य तकनीकों की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर के साथ साझेदारी में इंजीनियरिंग, जैव प्रौद्योगिकी और एआई को एक साथ लाकर अधिक तेज और सुलभ जांच समाधानों की संभावनाओं पर काम किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि भारत की स्वदेशी अनुसंधान क्षमता को मजबूत करके वैज्ञानिक खोजों को व्यावहारिक स्वास्थ्य समाधानों में बदलने और आत्मनिर्भर स्वास्थ्य नवाचार तंत्र विकसित करने में मदद मिलेगी। इसका लाभ भारत के साथ ग्लोबल साउथ के अन्य देशों को भी मिल सकता है।

उभरती तकनीकों और स्वास्थ्य नवाचार पर मंथन

सम्मेलन में आरती इंडस्ट्रीज में कॉरपोरेट रणनीति के प्रमुख, स्पेक्ट्रम इम्पैक्ट के प्रिंसिपल और इंडिया ट्रांसलेशनल रिसर्च इनिशिएटिव (ITRI) के संस्थापक मिरिक गोगरी ने मुख्य वक्तव्य दिया। इसके बाद ‘भारत के नवाचार भविष्य को आकार देने वाली उभरती प्रौद्योगिकियां’ विषय पर पैनल चर्चा हुई।

इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार और बेहतर समाज के निर्माण में तकनीक एवं अनुसंधान के उपयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।

आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने तीन व्याख्यान प्रस्तुत किए। गोल्डमैन सैक्स सस्टेनेबिलिटी चेयर के प्रोफेसर तरुण गुप्ता ने भारत के विकास के निर्णायक दशक में नवाचार की भूमिका पर विचार रखे। गैंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. अनिल के. ललवानी ने समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य पर चर्चा की, जबकि कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के डीन प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी ने अनुसंधान को वास्तविक दुनिया में प्रभावी बनाने के लिए सहयोग की जरूरत बताई।

21 प्रदर्शकों ने दिखाए नए तकनीकी समाधान

समन्वय 2026 में आयोजित प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी में 21 प्रदर्शकों ने भाग लिया। इनमें एंड्योरएयर, वाधवानी स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स, सी3आई हब, अनंत सिस्टम्स, गैंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, क्यूराडेव, क्यूट ब्रेन्स प्राइवेट लिमिटेड, कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी, ऑफग्रिड, स्कैननेक्स्ट, एयरावत रिसर्च फाउंडेशन और ब्रह्मियन स्पेसटेक समेत अन्य संस्थान एवं कंपनियां शामिल रहीं।

प्रदर्शनी में एयरोस्पेस, उन्नत सामग्री, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सतत ऊर्जा, चिकित्सा तकनीक, रोबोटिक्स और प्रिसिजन एग्रीकल्चर से जुड़े नवाचार प्रस्तुत किए गए। इन प्रदर्शनों ने संस्थान के अनुसंधान एवं नवाचार तंत्र की विविधता को सामने रखा।

मार्च 2029 तक एक अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य

आईआईटी कानपुर ने अपने व्यापक अनुसंधान और नवाचार प्रयासों के तहत 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में ‘ग्रेटर दैन अस’ (Greater Than Us) अभियान भी शुरू किया। इस अभियान का लक्ष्य मार्च 2029 तक एक अरब अमेरिकी डॉलर जुटाना है। इसके तहत संस्थान की बुनियादी क्षमताओं को मजबूत करने, प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और अत्याधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाएगा।

वर्ष 1959 में स्थापित आईआईटी कानपुर राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है। संस्थान के परिसर में 21 विभाग, 27 केंद्र, तीन अंतर्विषयी कार्यक्रम और तीन विशेष स्कूल हैं। यहां 580 से अधिक पूर्णकालिक फैकल्टी और 9,500 से अधिक विद्यार्थी हैं। समन्वय जैसे आयोजनों के जरिए संस्थान अनुसंधान को उद्योग की जरूरतों से जोड़ने और तकनीकी समाधानों को वास्तविक उपयोग तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास कर रहा है।

Related Articles

Back to top button

mahjong ways

slot777