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समाज परिवर्तन के लिए ईश्वरीय योजना अभियान का हुआ शुभारंभ

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गुरुग्राम – आज इंसान बनने की आवश्यकता है और ये इंसान बनने की फैक्ट्री ब्रह्माकुमारी ने लगा रखी है। यह बात मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री प्रतिभा भौमिक ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विधालय के समाज सेवा प्रभाग के “समाज परिवर्तन के लिए ईश्वरीय योजना” अभियान के शुभारम्भ कैंडल लाइटिंग करने के उपरांत कही, जिसका आयोजन ब्रह्माकुमारी के ओमशांति रिट्रीट सेंटर, गुरुग्राम में आज प्रात हुआ।

उन्होंने कहा समाज के परिवर्तन के लिए सोच में और व्यवहार में परिवर्तन के साथ साथ सरकार के व्यसन मुक्ति के कार्य में ये संस्था जन भागीदारी निभा रही है। साथ साथ राजयोग से मन को आंतरिक शांति, आनंद और शक्ति प्राप्त हो रही है। मोदी के सपने महिलाओं में जो शक्ति है उसे पिरो कर समाज को सशक्त बनाने का कार्य यहां हो रहा है।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में ओमशांति रिट्रीट सेंटर की निदेशिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आशा ने बताया कि ये अभियान समाज सेवा के मूल समाज सुधार में ले जाएगा। जिसमे मानव मानसिकता साफ, स्वच्छ और सकारात्मक होगी एवं समाज के स्वास्थ्य में अभिवृद्धि होगी। भगवान आकर ऐसे नैतिक मूल्यों की धरना करते है। जिससे सामाजिक बुराईयां उत्पन्न ही न हो। ये सोच रखनी है मैं जो कर्म करूंगा, मुझे देख ओर करेंगे।

ब्रह्माकुमारी के अतिरिक्त महासचिव राजयोगी ब्रह्माकुमार बृजमोहन ने कहा कि मानव में दुख अशांति बढ़ता जा रहा है। समाज सेवा काम पड़ रही है। इसलिए समाज सेवा की विधि में परिवर्तन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा भगवान ने इसका मूल चरित्र की गरीबी। ये चरित्र की गरीबी, अमीरों-गरीबों सभी में पाई जाती है।

इस दरिद्रता के 5 चिन्ह है काम, क्रोध, लोभ , मोह, अहंकार और ये 5 विकार ही हर व्यक्ति से लेकर देश विदेश की सभी समस्याओं का मूल है। परमात्मा धरा पर आकर आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग से इस मूल को खत्म कर सुखमय दुनिया स्थापन करने का कार्य कर रहे है।

प्रख्यात प्रेरणादायी वक्ता ब्रह्माकुमारी शिवानी ने इस अवसर पर कहा की समाज सेवा से पहले स्वयं के मन की सेवा जरूरी है। क्योंकि मन की स्थिति तन तक, बच्चो तक, लोगों तक, पौधों एवम जीवों तक प्रभाव डालती है। मन को सकारात्मक बनाएंगे तो समाज को सकारात्मकता दे पाएंगे। जैसे धन देने के लिए पहले धन कमाना जरूरी है वैसे ही मन को शांति और प्रेम सदभाव की विचारों से भरना होगा।

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