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विकास प्राधिकरणों के डिफॉल्टरों के लिए OTS, डिटेल में समझे

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विकास प्राधिकरणों, आवास एवं विकास परिषद तथा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों की संपत्तियों के डिफॉल्टरों को राहत देने के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) 2026 लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। योजना का उद्देश्य लंबे समय से लंबित बकाया राशि की वसूली करना और डिफॉल्टर आवंटियों को बकाया चुकाने का अवसर देना है।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि विभिन्न विकास प्राधिकरणों और संबंधित संस्थाओं में संपत्तियों से जुड़े 18,982 डिफॉल्टर मामलों में करीब 11,848.21 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके अलावा मानचित्र स्वीकृति से जुड़े 545 मामलों में लगभग 1,482.10 करोड़ रुपये की राशि लंबित है।

इन बकाया रकम की वसूली के लिए ओटीएस योजना लाई गई है। योजना के तहत आवासीय, व्यावसायिक और अन्य आवंटित संपत्तियों के साथ नीलामी या आवंटन पद्धति से दी गई संपत्तियों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा सरकारी संस्थानों, स्कूलों, चैरिटेबल संस्थाओं और अन्य संगठनों को आवंटित संपत्तियां तथा मानचित्र स्वीकृति से जुड़े डिफॉल्टर मामले भी योजना के दायरे में आएंगे।

ओटीएस योजना के तहत डिफॉल्टर आवंटियों से केवल साधारण ब्याज लिया जाएगा, जबकि दंड ब्याज पूरी तरह माफ कर दिया जाएगा। योजना के लिए आवेदन की अवधि तीन माह होगी और प्राप्त आवेदनों का निस्तारण भी तीन माह के भीतर किया जाएगा।

भुगतान की व्यवस्था के अनुसार 50 लाख रुपये तक की देय राशि पर एक-तिहाई भुगतान 30 दिन में और शेष दो-तिहाई तीन मासिक किस्तों में जमा करनी होगी। वहीं 50 लाख रुपये से अधिक की राशि पर एक-तिहाई भुगतान 30 दिन में और बाकी दो-तिहाई तीन द्विमासिक किस्तों में छह माह के भीतर जमा करना होगा। सरकार का मानना है कि इस योजना से डिफॉल्टरों को राहत मिलेगी और विकास प्राधिकरणों व आवासीय संस्थाओं की बड़ी राशि की वसूली संभव हो सकेगी।

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