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ईंधन की कमी नहीं… मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बोली सरकार- घबराहट में खरीदारी और अनावश्यक LPG बुकिंग से बचें उपभोक्ता

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पश्चिम एशिया में बदलती भू-राजनीतिक स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य के निरंतर बंद रहने के बीच केंद्र सरकार ने रविवार को कहा कि वह ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता सुनिश्चित करने, समुद्री परिचालन को सुरक्षित रखने और क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए व्यापक उपाय लागू कर रही है और इस पर कड़ी नजर बनाये हुए है। सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि ईंधन और आवश्यक ऊर्जा संसाधनों की निर्बाध उपलब्धता सर्वोच्च प्राथमिकता पर बनी हुई है।

इसके साथ ही, सरकार ने नागरिकों से घबराहट में आकर खरीदारी न करने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने का आग्रह किया है। केंद्र ने कहा कि देश भर की सभी रिफाइनरियां पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार के साथ उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित हो रहा है। रसोई गैस उत्पादन को भी खपत की जरूरतों को पूरा करने के लिए बढ़ाया गया है। देश भर में रिटेल ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।

उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इसके अतिरिक्त, घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क भी लगाया गया है। अफवाहों के कारण कुछ राज्यों में घबराहट में खरीदारी की छिटपुट घटनाएं सामने आयी थीं, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है।

सरकार ने घरों और परिवहन क्षेत्र को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दी है, जिससे पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) और सीएनजी परिवहन के लिए 100 प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को आपूर्ति वर्तमान में औसत खपत के लगभग 80 प्रतिशत पर बनी हुई है।

रसोई गैस की मांग पर दबाव कम करने के लिए अधिकारी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क के विस्तार में तेजी ला रहे हैं। आईजीएल, एमजीएल, गेल गैस और बीपीसीएल जैसी तेल और गैस कंपनियों ने घरेलू और वाणिज्यिक पीएनजी कनेक्शनों के लिए प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अधिसूचित नये नीतिगत ढांचे का उद्देश्य पाइपलाइन बुनियादी ढांचे में तेजी लाना और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी में सुधार करना है, जो गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर भारत के बदलाव का समर्थन करता है।

वैश्विक व्यवधानों के बावजूद, सरकार ने रसोई गैस वितरकों के पास स्टॉक खत्म होने जैसी किसी भी स्थिति की सूचना नहीं दी है। घरेलू एलपीजी की डिलीवरी सामान्य रूप से जारी है, जिसमें एक ही दिन में 55 लाख से अधिक रिफिल डिलीवर किये गये हैं। वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति को धीरे-धीरे संकट-पूर्व स्तर के 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। इसमें हॉस्पिटैलिटी, खाद्य प्रसंस्करण और स्टील, कपड़ा व रसायन जैसे महत्वपूर्ण उद्योगों को प्राथमिकता के आधार पर आवंटन किया गया है।

इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन उपायों को मजबूत किया गया है और डिजिटल बुकिंग में भी काफी उछाल आया है। सरकार ने राज्यों को 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है और उन्हें वितरण बिंदुओं की पहचान करने की सलाह दी है। साथ ही, राज्यों को एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए पीएनजी, इंडक्शन कुकटॉप और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया है।

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के माध्यम से छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं के लिए कोयले की आपूर्ति बढ़ायी गयी है, जबकि कृषि उत्पादन बनाये रखने के लिए उर्वरक संयंत्रों को गैस की निरंतर आपूर्ति मिल रही है। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत निगरानी तेज करने का निर्देश दिया गया है। इन उपायों में दैनिक प्रेस ब्रीफिंग, कंट्रोल रूम स्थापित करना और सख्त प्रवर्तन अभियान शामिल हैं।

अधिकारियों ने अब तक लगभग 2,900 छापेमारी की है, जिसमें एक ही दिन में करीब 1,000 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए। तेल विपणन कंपनियों ने भी 1,200 से अधिक आउटलेट्स का निरीक्षण किया है और लगभग 480 कारण बताओ नोटिस जारी किये हैं। ईंधन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने की बात दोहराते हुए सरकार ने नागरिकों से घबराहट में खरीदारी और अनावश्यक रसोई गैस बुकिंग से बचने का आग्रह किया है।

लोगों को रसोई गैस बुकिंग के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने और जहां भी संभव हो वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर विचार करने की सलाह दी गयी है। केंद्र ने ऊर्जा के जिम्मेदार उपभोग का भी आह्वान किया और गलत सूचनाओं के प्रति आगाह करते हुए कहा है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के दौरान जनता का विश्वास बनाये रखना महत्वपूर्ण है।

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