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Kupwara

तो क्या इसी तरह बेशर्मी से जहर उगलते रहेंगे फारूक अब्दुल्ला

फारूक अब्दुल्ला उम्र बढ़ने के साथ धीर-गंभीर और संतुलित और शांत होने की बजाय अनाप-शनाप बोलने से अब भी बाज नहीं आते। यह उनकी हताशा भी हो सकती है कि वे अब जम्मू-कश्मीर और देश की राजनीति में कतई महत्वपूर्ण नहीं रहे। उन्हें अब कोई गंभीरता से भी…

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