प्रधानमंत्री मोदी ने की साउथ ब्लॉक स्थित कार्यालय में मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक की अध्यक्षता
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को ब्रिटिश काल के सचिवालय भवन में स्थित अपने साउथ ब्लॉक स्थित कार्यालय में केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया, जहां प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित होंगे।
शाम चार बजे हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सभी मंत्री उपस्थित थे। ब्रिटिश राज की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 1900 के दशक की शुरुआत में ब्रिटिश वास्तुकार हर्बर्ट बेकर द्वारा डिजाइन किए गए परिसर में स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्रिमंडल की यह अंतिम बैठक थी।
इससे पहले, प्रधानमंत्री कार्यालय को सेवा तीर्थ में स्थानांतरित किए जाने के मौके पर प्रधानमंत्री ने कुछ महत्वपूर्ण फाइल पर हस्ताक्षर किए, जिनमें प्रत्येक नागरिक को जीवन रक्षक सुरक्षा प्रदान करने के लिए ‘पीएम राहत योजना’ शुरू करने और ‘लखपति दीदियों’ की संख्या को दोगुना करके छह करोड़ करने की मंजूरी शामिल है। इस कदम से एक युग का अंत होगा, क्योंकि सभी सरकारी विभाग नॉर्थ और साउथ ब्लॉक खाली कर देंगे, जो 1921 से सत्ता का केंद्र रहे हैं।
सरकार की योजना इन ऐतिहासिक इमारतों को ‘युग युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ में परिवर्तित करने की है, जो भारत की सभ्यतागत यात्रा को दर्शाने वाला विश्व स्तरीय संग्रहालय होगा। यह बदलाव 13 फरवरी को हुआ, जब 1931 में नयी दिल्ली को भारत की आधुनिक राजधानी के रूप में औपचारिक रूप से उद्घाटन किए जाने के 95 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
मोदी ने पीएमओ में भगवान गणेश की मूर्ति पर माल्यार्पण किया और महिलाओं, किसानों, युवाओं और कमजोर तबके के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिये। मोदी ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय सचिवालय के नए भवन विकसित भारत की दिशा में देश की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं और ये नागरिक-केंद्रित शासन एवं राष्ट्रीय प्रगति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
नए प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय सचिवालय की दो इमारतों का उद्घाटन करते हुए मोदी ने यह भी कहा कि इन इमारतों का निर्माण भारत के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है, जबकि केंद्रीय सचिवालय की दो इमारतों को ‘कर्तव्य भवन’ 1 और 2 कहा जाएगा।
उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों, वरिष्ठ नौकरशाहों और केंद्र सरकार के अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, “सेवा तीर्थ, कर्तव्य भवन 1 और 2, विकसित भारत की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। ये नागरिक-केंद्रित शासन और राष्ट्रीय प्रगति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।



