लखनऊ। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनहानि को कम करने के लिए सरकार लगातार वैज्ञानिक और व्यावहारिक कदम उठा रही है। इसी क्रम में मीरजापुर जिले में लागू किए गए “लाइटनिंग रेज़िलिएंसी मॉडल” के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली मौतों में लगभग 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
अधिकारियों के मुताबिक भौगोलिक संरचना, पथरीली जमीन और खनन गतिविधियों के कारण मीरजापुर लंबे समय से वज्रपात के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील रहा है। जिसे देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, आईआईटी रुड़की और अन्य संस्थानों के सहयोग से पिछले वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कर ‘लाइटनिंग हॉटस्पॉट मैप’ तैयार किया है।
‘लाइटनिंग हॉटस्पॉट मैप’ के आधार पर संवेदनशील क्षेत्रों में 80 स्थानों पर अर्ली स्ट्रीमर एमिशन आधारित लाइटनिंग अरेस्टर लगाए गए, जो बिजली को सुरक्षित रूप से धरती में प्रवाहित कर जान-माल की रक्षा करते हैं। मिर्जापुर के जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार के अनुसार वर्ष 2019 से 2022 के बीच हर साल 23 से 30 तक लोगों की मौत वज्रपात से होती थी, जबकि वर्ष 2024-25 और 2025-26 में यह संख्या घटकर 14 रह गई है।
यह गिरावट तकनीकी उपायों के साथ-साथ व्यापक जागरूकता अभियानों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि पूरे जिले में ‘वज्रपात सुरक्षा कार्यक्रम’ चलाकर अधिकारियों, ग्राम प्रधानों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं ‘दामिनी’ मोबाइल ऐप के जरिए समय रहते चेतावनी देने की व्यवस्था की गई।
साथ ही 809 ग्राम पंचायतों में माइकिंग, पोस्टर, वीडियो और पंचायत स्तरीय कार्यशालाओं के माध्यम से लोगों को सतर्क किया गया।जिसके फलस्वरूप मीरजापुर में वज्रपात जनहानि में उल्लेखनीय कमी आई है और इसे शून्य पर लाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में 80 स्थानों पर अर्ली स्ट्रीमर एमिशन आधारित लाइटनिंग अरेस्टर लगाए गए, जो बिजली को सुरक्षित रूप से धरती में प्रवाहित कर जान-माल की रक्षा करते हैं।
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