सच तो यह कि, जिसे ऊपर वाला बचाना चाहेगा, उसे कोई क्या मार सकता है? और यदि उसकी नज़र टेढ़ी हुई तो क्या कोई किसी को लाख जतन करके भी बचा सकता है? किसी निरीह बालक को ले जाकर जंगल में छोड़ दो तो भी बचाने वाला चाहेगा तो वह बच जाएगा।
इसके उलट यदि कोई डरता रहे कि बाहर निकला तो जाने क्या हो जाए और अपने बचाव का सारा उपाय करके घर में दुबका रहे तो भी सर्वनाश होना है, तो होकर ही रहेगा।
इधर यमुना के जिस कछार में संजीवक हुंकारता और दहाड़ता हुआ बेरोक-टोक घूम रहा था उसके पास के जंगल में पिंगलक नाम का एक शेर रहता था। पिंगलक शेर तो था ही, उस जंगल का राजा भी था। राजाओं की तरह ही कहीं भी जाना हो, वह अपने दल-बल के साथ चलता था।
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