राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष रेखा शर्मा से यह वेबसाइट भी पूर्णरूप से इत्तेफाक रखती है। NCW का भी मानना है कि नमूने का आकार छोटा है, इसलिए पूरे भारत का पैमाना नहीं हो सकता। NCW की अध्यक्ष का कहना एकदम सही है। क्या इंग्लैण्ड में चोरी-बदमासी और लूटपाट और रेप नहीं होते? यदि होते हैं तो पहले वहॉं की रिपोर्ट जारी की जाये कि वहॉं का दाना-पानी कैसे चलता है? क्या वे भगोड़ों के हमराही नहीं हैं?

थॉम्सन रायटर फाउंडेशन, उस देश के बारे में रिर्पोट जारी कर रहा है, जहॉं इक्का दुक्का ही ऐसी वारदातें होती हैं। उनके देश में तो सुबह औरत किसी के साथ है, दोपहर में दूसरे के साथ और रात में किसके साथ है, पता ही नहीं?

आप उसे हिंसा नहीं मानते? क्यों? हिंसा को तो आपने रूटीन का हिस्सा बनाया हुआ है। इसे आप सहमति का रूप दे रहे हैं। जबकि भारत में कल्चर दूसरा है। इंग्लैण्ड के संस्थान भारत की इज्जत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे संस्थानों को तो बैन कर देना चाहिए।

 

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